शिवपुराण में भगवान शिव के मूल मंत्रों का जिक्र किया गया है। यह मंत्र भक्तों के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का मार्ग है।
Shiv Puran: हिंदू धर्म में 18 महापुराणों का वर्णन है, जिसमें शिवपुराण सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला ग्रंथ माना जाता है। इसमें भगवान शिव की गाथा, महिमा, विभिन्न स्वरूप, ज्योतिर्लिंग और कथाओं का वर्णन किया गया है। इसके साथ ही शिवपुराण में ऐसे मंत्रों का भी जिक्र किया गया है, जिनका जाप करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
शिवजी को देवों के देव महादेव कहा गया है। हिंदू धर्म में भगवान शिव सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देवता हैं। भोलेनाथ साधारण तरीके से की गई पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं, क्योंकि महादेव भोग नहीं बल्कि भक्तों की भावना देखते हैं। शिव का नौ ग्रहों पर भी आधिपत्य है, इसलिए शिव की पूजा करने से सभी ग्रह भी अनुकूल रहते हैं।
शिवपुराण में भगवान शिव के मूल मंत्रों का जिक्र किया गया है। यह मंत्र भक्तों के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का मार्ग है। इन मंत्रों के जाप से न सिर्फ कष्ट दूर होते हैं बल्कि साधक को शांति और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। आइये जानते हैं शिवपुराण के अनुसार महादेव के मूल मंत्रों के बारे में- स्वास्थ्य के लिए: शिवपुराण के अनुसार 'ॐ नमः शिवाय' भगवान शिव का एक प्रभावशाली मंत्र है, जिसका प्रतिदिन जाप करने से शरीर सदैव रोग मुक्त रहता है और मनोवांछित की प्राप्ति होती है। इच्छा पूर्ति के लिए: 'ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः' भगवान शिव का रुद्र मंत्र है, जिसका प्रतिदिन जाप करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दीर्घायु के लिए: महादेव का महामृत्युंजय मंत्र 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्। 'उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' भी बहुत प्रभावशाली मंत्र माना जाता है। इसके जाप से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। आर्थिक संकट दूर करने के लिए: शिव गायत्री मंत्र 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।' वैदिक ज्योतिष में सुख-समृद्धि प्राप्ति का मंत्र माना जाता है। इसका प्रतिदिन जाप करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
मंत्र जाप की विधि:
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने वाले भक्त के मन में भक्ति और समर्पण की भावना होनी चाहिए। आप इन मंत्रों का जाप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं, क्योंकि रुद्राक्ष भगवान शिव को बहुत प्रिय है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि मंत्रों का जाप करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। प्रतिदिन 108 बार भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।