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Sawan Somvar Vrat Pooja Vidhi : क्या है सावन सोमवार की संपूर्ण पूजा विधि ,जानिए

जाीवांजलि धार्मिक डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sawan Somvar Vrat Pooja Vidhi :  सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है। इस महीने में आने वाले सावन के सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व है।

Sawan Somvar Vrat Pooja Vidhi
Sawan Somvar Vrat Pooja Vidhi :  सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले हर सोमवार का खास महत्व होता है। माना जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और सही रीति-रिवाजों के साथ भगवान शिव की पूजा करते हुए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अविवाहित महिलाओं को योग्य जीवनसाथी मिलता है, जबकि विवाहित महिलाओं के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा, भगवान शिव की कृपा से जीवन की कई मुश्किलें दूर होने लगती हैं। आइए, सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानें।

1. सुबह की तैयारी

सावन सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। यदि संभव हो, तो सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव से अपनी पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें।

2. पूजा सामग्री

 गंगाजल
 शुद्ध जल
  दूध
  दही
 शहद
 घी
 चीनी
बेलपत्र
धतूरा
भांग
आक के फूल
सफेद चंदन का लेप
अक्षत 
सफेद फूल
 मौली
दीपक
धूप
नैवेद्य 

3. शिवलिंग का अभिषेक

शिवलिंग का अभिषेक करें सबसे पहले भगवान गणेश का आह्वान करें। इसके बाद, शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल चढ़ाएं। फिर, पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत चढ़ाने के बाद, शिवलिंग को फिर से साफ पानी से नहलाएं। इसके बाद, चंदन का लेप, बिना टूटे चावल (अक्षत), फूल, बेल के पत्ते, धतूरा, भांग और फल उसी क्रम से चढ़ाएं। ध्यान रखें कि बेल के पत्ते में तीन पत्तियां हों और वह बिना टूटा हो। बेल का पत्ता चढ़ाते समय, उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर रखें।
 

 4. पूजा-विधि

अभिषेक के बाद, शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाकर तिलक करें। 
फिर बेलपत्र चढ़ाएं ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ हों और कटे-फटे या खराब न हों। 
इसके बाद, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद फूल, अक्षत और फल चढ़ाएं। 
अब, धूप और दीपक जलाएं और भगवान शिव की आरती करें।
 इसके बाद, माता पार्वती, भगवान गणेश और नंदी महाराज की भी पूजा करें
यदि संभव हो, तो शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें।
पूजा के बाद, सावन सोमवार व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। 
धार्मिक मान्यता है कि इस कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल मिलता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 6. व्रत का पालन

इस दिन, कई भक्त केवल फल ग्रहण करते हैं, जबकि अन्य बिना जल के या केवल जल पीकर व्रत रखते हैं। अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें। पूरे दिन भगवान शिव का स्मरण करें और क्रोध, झूठ बोलने या किसी का अपमान करने से बचें। सात्विक विचार रखें और जितना हो सके "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।

 7. शाम की पूजा

शाम को फिर से भगवान शिव की आरती करें। दीपक जलाएं और परिवार के साथ मिलकर भगवान शिव के भजन गाएं या शिव चालीसा का पाठ करें। इसके बाद प्रसाद बांटें और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का आशीर्वाद लें।

सावन सोमवार व्रत के दौरान क्या करें?

भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाएं।
शिव मंत्रों का जाप करें।
 गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।
सात्विक भोजन करें और सकारात्मक विचार रखें। 

सावन के सोमवार के व्रत के दौरान क्या न करें?

तामसिक भोजन, मांस या शराब का सेवन न करें।
गुस्सा करने, बहस करने और अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बचें।
टूटे हुए या गंदे बेलपत्र न चढ़ाएं।
पूजा में जल्दबाजी न करें; पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण करें।

व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद पाने का एक बेहतरीन अवसर है। यह व्रत मानसिक शुद्धि, आध्यात्मिक विकास और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा, आत्म-अनुशासन और सच्ची भक्ति के साथ किए जाने वाले इस व्रत से सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था बढ़ती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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