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Sawan Somvar Vrat Katha : सावन सोमवार व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए, जरूर पढ़ें ये कथा

जीवांजलि धार्मिक डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sawan Somvar Vrat Katha: सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है और इस महीने में आने वाले हर सोमवार का खास महत्व होता है। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं,

Sawan Somvar Vrat Katha
Sawan Somvar Vrat Katha :  सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है और इस महीने में आने वाले हर सोमवार का खास महत्व होता है। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, भगवान शिव और माता पार्वती उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। खासकर, कुंवारी महिलाओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है, जबकि विवाहित महिलाओं को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, फूल, धतूरा, भांग और इत्र चढ़ाएं और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। पूरे दिन व्रत रखें और शाम को सावन सोमवार की कथा सुनना न भूलें; इस कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत की कथा 

सावन सोमवार व्रत से जुड़ी कथा के अनुसार, एक शहर में एक अमीर व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, फिर भी वह दुखी रहता था क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी। संतान पाने के लिए वह पूरी श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखता था और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता था। एक दिन, माता पार्वती ने भगवान शिव से व्यापारी की इच्छा पूरी करने को कहा। भगवान शिव ने उत्तर दिया कि इस संसार में मनुष्य को अपने कर्मों का फल मिलता है और वही प्राप्त होता है जो उसकी किस्मत में लिखा होता है। फिर भी, पार्वती जी ने आग्रह किया और भगवान शिव से व्यापारी की इच्छा पूरी करने का अनुरोध किया। उनके अनुरोध को मानते हुए, भगवान शिव ने व्यापारी को पुत्र का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह शर्त भी रखी कि वह बालक केवल बारह वर्ष तक ही जीवित रहेगा।

व्यापारी के पुत्र की शिक्षा और विवाह का रहस्य

यह सुनकर व्यापारी को पुत्र प्राप्ति की खुशी तो हुई, लेकिन बालक की कम उम्र के बारे में जानकर वह दुखी भी हो गया। फिर भी उसने भगवान शिव की भक्ति और सोमवार के व्रत को पहले की तरह जारी रखा। समय बीतने पर व्यापारी के घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। जब बालक ग्यारह वर्ष का हुआ, तो उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए उसके मामा के साथ काशी भेजा गया। व्यापारी ने मामा को पर्याप्त धन देकर निर्देश दिया कि यात्रा के दौरान यज्ञ करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।

राजकुमारी के विवाह में हुआ अनोखा छल

काशी पहुँचने से पहले मामा और भांजा एक ऐसे राज्य में पहुँचे जहाँ राजा की पुत्री का विवाह होने वाला था। लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह तय हुआ था, वह एक आँख से अंधा था। दूल्हे के पिता ने व्यापारी के सुंदर पुत्र को देखकर एक योजना बनाई। उसने उसे असली दूल्हे के स्थान पर विवाह मंडप में बैठा दिया और सोचा कि विवाह के बाद उसे कुछ धन देकर विदा कर देगा तथा राजकुमारी को अपने अंधे पुत्र के साथ भेज देगा। व्यापारी का पुत्र इस योजना के लिए तैयार तो हो गया, लेकिन उसके मन में सत्य और धर्म सर्वोपरि थे।

राजकुमारी का निर्णय

विवाह संपन्न होने के बाद जब व्यापारी का पुत्र वहाँ से जाने लगा, तो उसने राजकुमारी की ओढ़नी पर एक संदेश लिख दिया "वास्तव में तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जा रहा है, वह एक आँख से अंधा है।जब राजकुमारी ने यह संदेश पढ़ा, तो उसने तुरंत उस अंधे राजकुमार के साथ जाने से इनकार कर दिया। इस प्रकार सत्य की जीत हुई और छल की योजना असफल हो गई।

काशी में यज्ञ और पुत्र की मृत्यु

इसके बाद मामा और भांजा काशी पहुँचे और वहाँ विधिपूर्वक यज्ञ कराया। जब व्यापारी का पुत्र बारह वर्ष का हुआ, तब उसके लिए एक विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। लेकिन नियति के अनुसार उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। अपने प्रिय भांजे को मृत देखकर मामा विलाप करने लगे और उनका दुख देखकर पूरा वातावरण शोकमय हो गया।

भगवान शिव का वरदान

उसी समय देवी पार्वती और भगवान शिव वहाँ से गुजर रहे थे। मामा का विलाप सुनकर माता पार्वती का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की "प्रभु, मैं इस व्यक्ति का दुख नहीं देख सकती। कृपया इसकी पीड़ा दूर कीजिए।" भगवान शिव ने बताया कि उस बालक की आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती ने आग्रह किया कि यदि बालक को जीवन नहीं मिला, तो उसके माता-पिता भी अपने प्राण त्याग देंगे। अंततः माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस बालक को पुनः जीवन प्रदान कर दिया और उसे दीर्घायु होने का वरदान दिया।

भगवान शिव की कृपा और सोमवार व्रत का फल

शिक्षा पूरी करने के बाद वह बालक सकुशल अपने घर लौट आया। व्यापारी और उसकी पत्नी ने संकल्प लिया था कि यदि उनका पुत्र जीवित वापस नहीं आया, तो वे भी अपने प्राण त्याग देंगे। लेकिन पुत्र को जीवित देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।रात्रि में भगवान शिव व्यापारी के स्वप्न में प्रकट हुए और बोले"हे व्यापारी! सोमवार का व्रत रखने और श्रद्धा से मेरी कथा सुनने के कारण मैं प्रसन्न हुआ हूँ। इसी भक्ति के फलस्वरूप मैंने तुम्हारे पुत्र को नया जीवन और लंबी आयु का आशीर्वाद दिया है।"

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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