Mahabharata Mythological Story: महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि इसमें अनेक राजवंशों, विवाह संबंधों और पात्रों के जीवन से जुड़ी ऐसी घटनाएं भी वर्णित हैं, जो आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बनी हुई हैं। पांडवों में सबसे बड़े और धर्मराज कहलाने वाले युधिष्ठिर का जीवन भी अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा हुआ था। सामान्यतः जब युधिष्ठिर के विवाह की चर्चा होती है तो सबसे पहले द्रौपदी का नाम सामने आता है, क्योंकि द्रौपदी पांचों पांडवों की सामूहिक पत्नी थीं। हालांकि महाभारत के विभिन्न पर्वों में उल्लेख मिलता है कि द्रौपदी के अतिरिक्त युधिष्ठिर का एक और विवाह भी हुआ था। इस कारण पौराणिक ग्रंथों के अनुसार युधिष्ठिर की कुल दो पत्नियां मानी जाती हैं।
युधिष्ठिर का पहला विवाह
युधिष्ठिर के जीवन का सबसे प्रसिद्ध विवाह पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री द्रौपदी के साथ हुआ था। द्रौपदी का स्वयंवर आयोजित किया गया था, जिसमें आर्यावर्त के अनेक राजा और राजकुमार उपस्थित हुए थे। स्वयंवर में एक कठिन लक्ष्य रखा गया था। घूमती हुई मछली की आंख को नीचे रखे जल में उसका प्रतिबिंब देखकर भेदना था।
कर्ण सहित अनेक वीर इस लक्ष्य को भेदने में असफल रहे। अंततः अर्जुन ने ब्राह्मण वेश में उपस्थित होकर इस लक्ष्य को साध लिया और द्रौपदी को जीत लिया। स्वयंवर के बाद अर्जुन अपने भाइयों के साथ माता कुंती के पास पहुंचे। उन्होंने बिना देखे यह कह दिया कि जो कुछ लाए हो, उसे आपस में बांट लो। माता की आज्ञा को धर्म मानते हुए और महर्षि व्यास के निर्देश पर द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी बनीं।
द्रौपदी और युधिष्ठिर का संबंध
यद्यपि द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी थीं, फिर भी युधिष्ठिर सबसे बड़े भाई और हस्तिनापुर के उत्तराधिकारी होने के कारण परिवार के प्रमुख माने जाते थे। द्रौपदी ने इंद्रप्रस्थ के राजमहल में महारानी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजसूय यज्ञ के समय भी द्रौपदी युधिष्ठिर के साथ प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
द्यूत क्रीड़ा की घटना में भी द्रौपदी का नाम विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। जब शकुनि के छल से युधिष्ठिर अपना राज्य, धन-संपत्ति और भाइयों को हार गए, तब उन्होंने द्रौपदी को भी दांव पर लगा दिया। इसके बाद कौरव सभा में जो घटनाएं हुईं, वे महाभारत की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनी जाती हैं। वनवास और अज्ञातवास के कठिन वर्षों में भी द्रौपदी युधिष्ठिर तथा अन्य पांडवों के साथ रहीं। कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बने, तब द्रौपदी महारानी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं।
युधिष्ठिर का दूसरा विवाह
महाभारत में वर्णन मिलता है कि द्रौपदी के अतिरिक्त युधिष्ठिर ने शिवि देश के राजा गोवासन की पुत्री देविका से भी विवाह किया था। यह विवाह स्वयंवर के माध्यम से संपन्न हुआ था। देविका का उल्लेख महाभारत में अपेक्षाकृत कम मिलता है, जिसके कारण बहुत से लोगों को उनके बारे में जानकारी नहीं होती। हालांकि आदिपर्व और अन्य पौराणिक विवरणों में उनके विवाह का उल्लेख स्पष्ट रूप से प्राप्त होता है। कथा के अनुसार शिवि देश में राजकुमारी देविका का स्वयंवर आयोजित किया गया था। युधिष्ठिर भी वहां पहुंचे और स्वयंवर की प्रक्रिया के बाद देविका ने उन्हें अपना पति चुना। इस प्रकार युधिष्ठिर और देविका का विवाह संपन्न हुआ।
कौन थीं देविका?
देविका शिवि देश के राजा गोवासन की पुत्री थीं। शिवि जनपद प्राचीन भारत के प्रतिष्ठित राज्यों में से एक माना जाता था। देविका को सौम्य स्वभाव, धर्मनिष्ठा और राजकुल की मर्यादाओं का पालन करने वाली राजकुमारी बताया गया है। महाभारत में उनका उल्लेख द्रौपदी जितना विस्तृत नहीं है, लेकिन वे युधिष्ठिर की विधिवत पत्नी थीं। पांडवों के राजपरिवार में उनका सम्मानपूर्ण स्थान था।
देविका से उत्पन्न पुत्र
पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि देविका और युधिष्ठिर के एक पुत्र हुआ था, जिसका नाम यौधेय था। यौधेय को एक पराक्रमी राजकुमार माना गया है। महाभारत में पांडवों के विभिन्न विवाहों से उत्पन्न पुत्रों का वर्णन मिलता है। जिस प्रकार भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव के अलग-अलग पुत्र थे, उसी प्रकार युधिष्ठिर और देविका के पुत्र यौधेय का भी उल्लेख किया गया है।
द्रौपदी से युधिष्ठिर का पुत्र