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Kab Hai Shani Trayodashi : कब है शनि त्रयोदशी जानिए तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Kab Hai Shani Trayodashi :  शनि त्रयोदशी, जिसे आमतौर पर शनि प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव और न्याय और कर्म के देवता शनिदेव को समर्पित दिन है। 

 Kab Hai Shani Trayodashi : 
 Kab Hai Shani Trayodashi :  शनि त्रयोदशी, जिसे आमतौर पर शनि प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव और न्याय और कर्म के देवता शनिदेव को समर्पित दिन है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष या शनि त्रयोदशी व्रत कहा जाता है। इस दिन, भक्त देवी पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं। यह दिन शनिदेव की विशेष कृपा पाने के लिए भी बहुत खास माना जाता है।

शनि त्रयोदशी कब है?

तारीख: 27 जून, 2026, शनिवार
प्रदोष काल: 19:23 से 21:23
त्रयोदशी तिथि शुरू: 26 जून, 2026 को 22:22 बजे
त्रयोदशी तिथि खत्म: 27 जून, 2026 को 24:43+ बजे

शनि त्रयोदशी व्रत का महत्व

शनि त्रयोदशी के दिन, शाम को प्रदोष काल में 'शिव पूजा' करने का रिवाज है। मान्यता के अनुसार, शनि प्रदोष के दिन भगवान शिव की सही तरीके से पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है। जिन लोगों की संतान नहीं है, उन्हें खास तौर पर शनि प्रदोष व्रत रखना चाहिए। भगवान शिव की कृपा से अच्छी संतान की प्राप्ति होती है। यह भी माना जाता है कि इस दिन शनि देव की पूजा करके उनके प्रकोप से बचने से सभी तरह की परेशानियों से राहत मिलती है और शनि देव की खास कृपा मिलती है। जो लोग अपने जीवन में शनि के बुरे असर से राहत चाहते हैं, उन्हें इस दिन खास पूजा-पाठ करके शनि भगवान को खुश करना चाहिए।

शनि त्रयोदशी पूजा विधि

सबसे पहले, अपने घर को साफ करें और पूजा की जगह पर चटाई बिछाएं।
शनि देव और शिवलिंग को स्थापित करें।
एक दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
शिवलिंग का जल, दूध और घी से अभिषेक करें।
बेल के पत्ते और फूल चढ़ाएं।
शनि देव की मूर्ति या तस्वीर पर तुलसी, सफेद फूल, हल्दी और चावल चढ़ाएं। शनि मंत्र: "ॐ शं शनिश्चराय नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें।
भगवान शिव के लिए "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
आखिर में, शनि देव और भगवान शिव से दुख से राहत, सफलता, खुशहाली और अपने परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करें।
श्रद्धा और नियम से किया जाने वाला शनि प्रदोष व्रत जीवन की मुश्किलों को दूर करता है।
व्रत करने से धन, सेहत, सम्मान, शोहरत और शादीशुदा ज़िंदगी में खुशी मिलती है।
खास तौर पर, शनि की कृपा मिलती है और उनके बुरे असर खत्म होते हैं।
व्रत के दिन दूध, दही, अनाज और हल्का खाना खाएं।
काले कपड़े पहनना और काले तिल दान करना भी शुभ माना जाता है।
व्रत एक दिन या लगातार कई शनि प्रदोष दिनों तक रखा जा सकता है।

शनि प्रदोष व्रत के नियम

शनि प्रदोष व्रत खास तौर पर शनिवार को रखा जाता है। प्रदोष काल (सूरज डूबने से लगभग 1.5 घंटे पहले से 1.5 घंटे बाद तक) में पूजा करना शुभ होता है।
व्रत वाले दिन नहाना ज़रूर करें।
साफ़ कपड़े पहनें। काले या नीले कपड़े पहनना खास तौर पर शुभ माना जाता है।
पूरे दिन का व्रत रखना सबसे अच्छा होता है।
अगर मुश्किल हो, तो आप फल, दूध या हल्का खाना खा सकते हैं।
घर में पूजा की जगह को साफ़ और व्यवस्थित रखें।
शिवलिंग और शनि देव की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें।
दीपक, अगरबत्ती और शुद्ध जल का इस्तेमाल करें।
शनि मंत्र: "ॐ शं शनिश्चराय नमः" का जाप करें।
शिव मंत्र: "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें।
गरीबों या ज़रूरतमंदों को काले तिल, काले कपड़े, चना या दूसरा अनाज दान करें।
श्रद्धा से पूजा करें और किसी से नफ़रत या दुश्मनी न रखें।
व्रत के दौरान पॉज़िटिव सोच और संयमित व्यवहार रखें।
गुस्सा, झगड़ा या नेगेटिव काम मना हैं। शनि प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि, सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। शनि की कृपा बढ़ती है और दुख, बीमारी और पैसे की दिक्कतें दूर होती हैं।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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