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Diwali Puja Tips: दीवाली पूजन के समय पूजा घर में मां लक्ष्मी की मूर्ति किस दिशा में रखें? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali Puja Tips: दिवाली पूजन में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करनी चाहिए। 

Diwali
Diwali: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और उनकी विशेष पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। हालांकि, पूजा करते समय मूर्तियों की स्थापना की दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि दिवाली पूजन के समय मां लक्ष्मी की मूर्ति किस दिशा में रखनी चाहिए और पूजा की चौकी किस तरह सजानी चाहिए? क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में मूर्ति की सही दिशा का इतना महत्व क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और जरूरी नियम।

किस दिशा में रखें मां लक्ष्मी की मूर्ति?

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पूजन के समय मां लक्ष्मी की मूर्ति को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर स्थापित करना शुभ माना जाता है। पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना अच्छा माना जाता है। कई परंपराओं में मां लक्ष्मी की मूर्ति को इस तरह रखने की सलाह दी जाती है कि पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। मान्यता है कि पूर्व दिशा सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

किस दिशा में रखें पूजा की चौकी?

दिवाली के दिन पूजा की चौकी को घर के साफ-सुथरे और शांत स्थान पर रखना चाहिए। इसके लिए घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा शुभ माना जाता है। चौकी पर साफ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जा सकती हैं। ध्यान रखें कि पूजा स्थल के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान न हो। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान पर पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की स्थापना

दिवाली पूजन में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करनी चाहिए। इसलिए दिवाली की पूजा में पहले भगवान गणेश और फिर मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है। मूर्तियों की स्थापना करते समय इस बात का ध्यान रखें कि दोनों प्रतिमाएं साफ और सही स्थिति में हों। कई परंपराओं में मां लक्ष्मी को भगवान गणेश के दाईं ओर स्थापित किया जाता है।

मूर्ति स्थापित करते समय इन बातों का रखें ध्यान

दिवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी की मूर्ति चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी की प्रसन्न मुद्रा वाली प्रतिमा को शुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति की स्थापना करना अच्छा माना जाता है, जिसमें मां लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान हों। पूजा के दौरान खंडित या टूटी हुई मूर्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूजा स्थल पर दीपक, धूप, फूल, अक्षत, रोली और मिठाई जैसी पूजन सामग्री पहले से रख लेनी चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है सही दिशा?

वास्तु शास्त्र में दिशाओं को विशेष महत्व दिया गया है। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर से संबंधित माना जाता है, जबकि पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा कहा जाता है। इसी वजह से पूजा के समय इन दिशाओं का चयन शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही दिशा में पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, विश्वास और साफ मन से की गई आराधना का होता है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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