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Diwali: दिवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा क्यों है खास? जानें शुभता से जुड़ी मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, रोशनी और सकारात्मक वातावरण होता है, वहां उनका स्वागत किया जाता है। 

Diwali
Diwali: दिवाली का त्योहार आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और रोशनी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन लोग अपने घरों को दीयों, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से खूबसूरत बनाते हैं। दिवाली पर घर के मुख्य द्वार और आंगन में रंगोली बनाने की भी खास परंपरा है। कोई फूलों से रंगोली सजाता है तो कोई रंगों और चावल के आटे से सुंदर आकृतियां बनाता है। धार्मिक मान्यता है कि रंगोली घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है और इसका मां लक्ष्मी के आगमन से क्या संबंध है? आइए जानते हैं।

मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है रंगोली

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, रोशनी और सकारात्मक वातावरण होता है, वहां उनका स्वागत किया जाता है। इसी मान्यता के चलते लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं। इसे मां लक्ष्मी के स्वागत और उनके आगमन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सुंदर और आकर्षक रंगोली घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ शुभता का संदेश भी देती है।

घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक

भारतीय परंपरा में रंगोली को केवल सजावट का माध्यम नहीं माना गया है, बल्कि इसे सुख-समृद्धि और खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है। दिवाली पर रंगोली बनाने के पीछे मान्यता है कि इससे घर में शुभता का संचार होता है। रंगोली के चमकीले रंग खुशियों, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। यही वजह है कि दिवाली के दिन लोग अपने घरों के आंगन और प्रवेश द्वार को रंगोली से सजाना पसंद करते हैं।

मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने की परंपरा

दिवाली पर मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाया जाता है। दरवाजे के दोनों ओर दीपक जलाने के साथ रंगोली बनाई जाती है। कई घरों में रंगोली के बीच में दीपक रखा जाता है, जबकि कुछ लोग कमल के फूल, स्वास्तिक, शुभ-लाभ और मां लक्ष्मी के चरणों की आकृति बनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार घर में प्रवेश का स्थान होता है, इसलिए इसे साफ-सुथरा और सुंदर रखना शुभ माना जाता है। रंगोली इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कमल और मां लक्ष्मी के चरणों की रंगोली का महत्व

दिवाली पर कमल के फूल और मां लक्ष्मी के चरणों वाली रंगोली बनाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कमल का फूल मां लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है और इसे पवित्रता, सुंदरता तथा समृद्धि का प्रतीक समझा जाता है। वहीं, मां लक्ष्मी के चरणों की आकृति बनाकर लोग देवी के घर में आगमन की कामना करते हैं। कई परिवारों में मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक मां लक्ष्मी के पैरों के छोटे-छोटे निशान भी बनाए जाते हैं। इसे देवी के स्वागत से जुड़ी पारंपरिक मान्यता माना जाता है।

रंगोली में रंगों का भी है खास महत्व

रंगोली बनाते समय अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। लाल रंग को शुभता और ऊर्जा, पीले रंग को समृद्धि, हरे रंग को खुशहाली और सफेद रंग को शांति का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर लोग अपनी पसंद और परंपरा के अनुसार इन रंगों से तरह-तरह की आकृतियां बनाते हैं। कुछ लोग प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और चावल के आटे से भी रंगोली तैयार करते हैं। इस तरह रंगोली त्योहार की रौनक बढ़ाने के साथ भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मान्यताओं को भी दर्शाती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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