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Dhanteras: धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार पर क्यों जलाते हैं दीपक, जानें धार्मिक मान्यता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Dhanteras Puja Vidhi: धनतेरस पर मुख्य द्वार पर दीपक जलाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है।
 

Dhanteras
Dhanteras Religious Beliefs: हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस से ही पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। इसके साथ ही शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आइए जानते हैं कि धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार पर दीपक क्यों जलाया जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। ऐसा माना जाता है कि दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मकता को दूर करता है। मुख्य द्वार घर का प्रवेश स्थान होता है, इसलिए यहां दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। मान्यता है कि जिस घर का वातावरण स्वच्छ, पवित्र और प्रकाशमय रहता है, वहां माता लक्ष्मी का वास होता है। इसी विश्वास के साथ लोग धनतेरस की शाम अपने घर के प्रवेश द्वार को दीपों से सजाते हैं।

यम दीपदान से जुड़ी है मान्यता

धनतेरस पर दीपक जलाने की एक महत्वपूर्ण परंपरा यम दीपदान भी है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा हिमा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु होने का योग बताया गया था। जब उनकी पत्नी को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपने पति की रक्षा करने का उपाय सोचा। कथा के अनुसार, विवाह के चौथे दिन पत्नी ने घर के मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और धन के ढेर के साथ कई दीपक जलाए। इसके बाद उन्होंने पूरी रात जागकर गीत और कथाएं सुनाईं। 

जब यमराज सर्प का रूप लेकर वहां पहुंचे, तो दीपकों की तेज रोशनी और आभूषणों की चमक के कारण वे भीतर प्रवेश नहीं कर सके। इस तरह राजकुमार की जान बच गई। इसी मान्यता के आधार पर धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है।

मुख्य द्वार पर दीपक कैसे जलाएं?

धनतेरस के दिन सबसे पहले घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए। शाम के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर की पूजा करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार, यम दीपदान के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

दीपक जलाने का आध्यात्मिक संदेश

धनतेरस पर मुख्य द्वार पर दीपक जलाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है। यह हमें सिखाता है कि जिस तरह दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी तरह अच्छे विचार और कर्म जीवन की परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं। इसलिए इस धनतेरस श्रद्धा के साथ दीपदान करें और अपने घर-परिवार की खुशहाली की कामना करें।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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