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Diwali: दिवाली पर चौमुखी दीपक क्यों जलाया जाता है? जानें इस परंपरा का धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali: चौमुखी दीपक के चारों मुखों को अलग-अलग धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने, सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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Diwali: दिवाली का त्योहार दीपों की रोशनी, पूजा-पाठ और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों में अलग-अलग तरह के दीपक जलाने की परंपरा है। इन्हीं में से एक है चौमुखी दीपक, जिसे दिवाली की रात जलाना विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि चार मुख वाला यह दीपक घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता का संचार करता है। धार्मिक मान्यताओं में इसके चारों मुखों का भी विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर चौमुखी दीपक ही क्यों जलाया जाता है और इसके चार मुख किस बात का प्रतीक हैं? आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक महत्व।

चौमुखी दीपक का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और शुभता का प्रतीक माना गया है। चौमुखी दीपक सामान्य दीपक से अलग होता है, क्योंकि इसमें चार दिशाओं में बाती जलाने की व्यवस्था होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चार मुख वाला दीपक चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाने और जीवन से अंधकार दूर करने का प्रतीक है। दिवाली पर इसे जलाने के पीछे मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के जीवन में खुशहाली आती है।

चार मुखों का धार्मिक अर्थ

चौमुखी दीपक के चारों मुखों को अलग-अलग धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने, सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में चार मुखों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष यानी जीवन के चार पुरुषार्थों से भी जोड़ा जाता है। इसका भाव यह है कि मनुष्य के जीवन में सुख-सुविधाओं के साथ धर्म और आध्यात्मिक उन्नति का भी महत्व होना चाहिए।

दिवाली पर क्यों जलाते हैं चौमुखी दीपक?

दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस अवसर पर घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि चौमुखी दीपक जलाने से घर के आसपास शुभता बनी रहती है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चारों दिशाओं में फैलने वाला इसका प्रकाश जीवन में आने वाली परेशानियों और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि कई घरों में दिवाली के दिन विशेष रूप से चौमुखी दीपक जलाया जाता है।

कहां जलाना चाहिए चौमुखी दीपक?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दिवाली पर चौमुखी दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाना शुभ माना जाता है। कुछ लोग इसे घर के आंगन या पूजा स्थल के पास भी रखते हैं। इसे जलाते समय दीपक को साफ स्थान पर रखना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि आसपास कोई ज्वलनशील वस्तु न हो। दीपक में घी या तिल का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसे रखने की दिशा और स्थान को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।

चौमुखी दीपक जलाने से जुड़ी मान्यता

मान्यता है कि दिवाली की रात चौमुखी दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता है। इसके चारों ओर फैलने वाला प्रकाश परिवार के जीवन में खुशहाली और सकारात्मकता का संदेश देता है। इसे केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। यही कारण है कि दिवाली पर चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा आज भी कई घरों में श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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