facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  festivals›  diwali ki rat lakshmi pujan ke bad kaudi ko lal kapde me bandhkar kyon rakhte hain janiye dharmik mahatva

Diwali: दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर क्यों रखते हैं? जानें धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग को शुभता, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा में भी लाल रंग के वस्त्र, फूल और चुनरी का विशेष महत्व होता है।

Diwali
Diwali: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन घरों में विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान कई ऐसी परंपराएं भी निभाई जाती हैं, जिनका संबंध सुख-समृद्धि और धन-धान्य से जुड़ा हुआ है। इन्हीं में से एक परंपरा है दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर रखना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौड़ी को मां लक्ष्मी से जुड़ा शुभ प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा के बाद कौड़ी को लाल कपड़े में ही क्यों बांधा जाता है और इसे घर में रखने का क्या महत्व है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और परंपरा।

कौड़ी का मां लक्ष्मी से संबंध

हिंदू धर्म में कौड़ी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं और पारंपरिक पूजा-पद्धतियों में इसका संबंध मां लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। प्राचीन समय में कौड़ियों का इस्तेमाल लेन-देन और मुद्रा के रूप में भी किया जाता था। यही वजह है कि समय के साथ कौड़ी को धन-संपन्नता और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक माना जाने लगा। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा में कौड़ी रखने की परंपरा भी इसी मान्यता से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि पूजा में कौड़ी अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

लाल कपड़े में कौड़ी बांधने का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग को शुभता, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा में भी लाल रंग के वस्त्र, फूल और चुनरी का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के बाद कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि लाल कपड़े में रखी कौड़ी घर में सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक बनती है। इसे मां लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि, यह एक पारंपरिक धार्मिक मान्यता है, जिसका पालन लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार करते हैं।

लक्ष्मी पूजन के बाद क्यों रखते हैं कौड़ी?

दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के दौरान कुछ लोग मां लक्ष्मी को पीली कौड़ियां अर्पित करते हैं। पूजा पूरी होने के बाद इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी, धन रखने के स्थान या पूजा घर में रखा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन की बरकत बनी रहती है और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। कई परिवारों में इसे पूरे साल संभालकर रखने की परंपरा भी है। इसके पीछे भाव यह है कि मां लक्ष्मी की कृपा घर में बनी रहे और परिवार को कभी धन-धान्य की कमी न हो।

कितनी कौड़ियां रखना माना जाता है शुभ?

कौड़ियों की संख्या को लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। कुछ लोग लक्ष्मी पूजन में पांच कौड़ियां रखते हैं, तो कुछ सात या ग्यारह कौड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। कई जगह पीली कौड़ियों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। हालांकि, शास्त्रीय रूप से सभी के लिए एक निश्चित संख्या का नियम नहीं बताया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यता के अनुसार कौड़ियां रखते हैं।

कौड़ी को कहां रखना चाहिए?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, लक्ष्मी पूजन के बाद लाल कपड़े में बांधी गई कौड़ियों को घर की तिजोरी, अलमारी या उस स्थान पर रखा जा सकता है, जहां धन और जरूरी कीमती वस्तुएं रखी जाती हैं। कुछ लोग इसे अपने पूजा स्थल में भी रखते हैं। मान्यता है कि कौड़ी को साफ और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए। इसे रखते समय मां लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

यह भी पढ़ें-

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा 

Narak Chaturdashi 2026: कब है नरक चतुर्दशी? जानें छोटी दिवाली की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व 

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानें इसका महत्व और परंपरा 
 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel