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Diwali Utsav: धनतेरस से दीवाली तक कौन करता है पृथ्वी पर शासन? पौराणिक कथा से जाने इसका रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali Utsav: राजा बलि को मिले इसी वरदान के कारण दीवाली पर दीपक जलाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों घर के अंदर और बाहर दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

Diwali Utsav
Diwali Utsav: दीवाली का त्योहार आते ही घरों में दीपक जलाने, मां लक्ष्मी की पूजा करने और सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा शुरू हो जाती है। धनतेरस से लेकर दीवाली तक हर दिन का अपना अलग धार्मिक महत्व है। लेकिन क्या आपको पता है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों पृथ्वी पर भगवान विष्णु का नहीं, बल्कि एक असुर राजा का शासन रहता है? यह राजा कोई और नहीं, बल्कि राजा बलि हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार में राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें विशेष वरदान दिया था। इसी वरदान के कारण दीवाली के दिनों में राजा बलि के पृथ्वी पर शासन करने की कथा प्रचलित है। आखिर कौन थे राजा बलि और भगवान विष्णु ने उन्हें ऐसा वरदान क्यों दिया था? आइए जानते हैं इस रोचक पौराणिक कथा के बारे में।

कौन करते हैं पृथ्वी पर शासन?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु हैं। वह पूरे संसार का संचालन और संरक्षण करते हैं। हालांकि, एक पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस से दीवाली तक तीन दिनों के लिए पृथ्वी पर राजा बलि का शासन माना जाता है। इस दौरान दीपक जलाने की परंपरा को भी राजा बलि से मिले वरदान से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इन दिनों जो व्यक्ति अपने घर में दीपमाला जलाता है, उसके यहां मां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। यही वजह है कि धनतेरस और दीवाली के अवसर पर घरों को दीपों से सजाने का विशेष महत्व बताया गया है।

कौन थे राजा बलि?

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा बलि असुरों के महान और शक्तिशाली राजा थे। वह प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र थे। प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे और उनके संस्कारों का प्रभाव राजा बलि पर भी था। राजा बलि अपनी दानवीरता, पराक्रम और उदार स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। उनके शासन में प्रजा सुखी और संपन्न थी। उन्होंने अपनी शक्ति और तपस्या के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए थे, क्योंकि स्वर्ग लोक पर भी उनका अधिकार हो गया था। इसके बाद सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनसे सहायता की प्रार्थना की।

भगवान विष्णु ने लिया वामन अवतार

देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। वह एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे। उस समय राजा बलि यज्ञ कर रहे थे और ब्राह्मणों को दान दे रहे थे। राजा बलि ने वामन देव का आदरपूर्वक स्वागत किया और उनसे मनचाहा दान मांगने के लिए कहा। इस पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप ने उनसे केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि को यह मांग बहुत छोटी लगी। उन्होंने वामन देव से कुछ और मांगने के लिए कहा, लेकिन भगवान अपनी मांग पर अडिग रहे। राजा बलि ने तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।

तीन पग में नाप लिए तीनों लोक

राजा बलि से वचन मिलते ही भगवान विष्णु ने अपना विराट स्वरूप धारण कर लिया। उनके पहले पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक समा गया। अब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा था। तब भगवान विष्णु ने राजा बलि से पूछा कि तीसरा पग कहां रखें? अपने वचन का मान रखने के लिए राजा बलि ने बिना किसी संकोच के अपना सिर आगे कर दिया और भगवान से उस पर तीसरा पग रखने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने राजा बलि के सिर पर अपना पैर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। हालांकि, राजा बलि की दानशीलता और वचन निभाने की भावना से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए।

भगवान विष्णु ने दिया विशेष वरदान

कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि की उदारता से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब राजा बलि ने भगवान से प्रार्थना की कि उन्हें तीन दिनों तक संपूर्ण पृथ्वी का राजा बनने का अवसर दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी वर मांगा कि उनके शासनकाल में जो भी व्यक्ति अपने घर में दीपमाला प्रज्ज्वलित करे, उसके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी निवास हो। भगवान विष्णु ने राजा बलि की इच्छा स्वीकार कर उन्हें तथास्तु कहा। इस तरह राजा बलि को तीन दिनों तक पृथ्वी पर शासन करने का वरदान प्राप्त हुआ। यह तीन दिन धनतेरस से लेकर दीवाली तक माने जाते हैं।

दीपक जलाने से जुड़ी है यह मान्यता

राजा बलि को मिले इसी वरदान के कारण दीवाली पर दीपक जलाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों घर के अंदर और बाहर दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। दीपों की रोशनी को सुख, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि धनतेरस से ही घरों में दीप प्रज्ज्वलित करने का सिलसिला शुरू हो जाता है और दीवाली की रात पूरे घर को दीपों से रोशन किया जाता है। इस कथा में राजा बलि की दानवीरता और भगवान विष्णु की उदारता दोनों का सुंदर प्रसंग देखने को मिलता है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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