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Diwali Puja: दिवाली की रात निशिता काल में क्यों की जाती है पूजा? जानें इसका धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Diwali Festival: दिवाली की रात निशिता काल में मां लक्ष्मी का स्मरण करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस समय की गई पूजा व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है और जीवन में सकारात्मकता लाने की प्रेरणा देती है। 

Diwali Puja
Lakshmi Ganesh Puja: दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर जाकर उन्हें सुख-समृद्धि और धन-वैभव का आशीर्वाद देती हैं। दिवाली के दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। वहीं, रात के समय निशिता काल में भी पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निशिता काल को साधना, मंत्र जाप और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन आखिर निशिता काल क्या होता है और इस समय पूजा करने का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

क्या होता है निशिता काल?

हिंदू पंचांग के अनुसार, रात का मध्य समय निशिता काल कहलाता है। सामान्य रूप से यह समय आधी रात के आसपास होता है। धार्मिक मान्यताओं में इस समय को बहुत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि निशिता काल में वातावरण शांत रहता है और व्यक्ति का मन पूजा-पाठ तथा साधना में आसानी से एकाग्र हो सकता है। इसी वजह से इस समय विशेष देवी-देवताओं की आराधना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।

निशिता काल में क्यों होती है पूजा?

दिवाली की रात निशिता काल में पूजा करने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि इस समय मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा और मंत्र जाप किया जा सकता है। विशेष रूप से तांत्रिक परंपराओं में निशिता काल का बहुत महत्व बताया गया है। इस समय मां महालक्ष्मी और मां काली की आराधना करने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निशिता काल में की गई साधना से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। हालांकि, सामान्य गृहस्थ परिवारों में दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करना अधिक प्रचलित है।

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए क्या करें?

दिवाली की रात निशिता काल में मां लक्ष्मी का स्मरण करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। इस समय पूजा करते हुए घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी को कमल का फूल, फल, मिठाई और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। इस दौरान घर में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी स्वच्छ और सुंदर स्थान पर निवास करती हैं। इसलिए दिवाली के दिन घर को दीपों और रंगोली से सजाने की परंपरा भी है।

किन बातों का रखें ध्यान?

निशिता काल में पूजा करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान का स्मरण करना चाहिए। पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को अधिक महत्व देना चाहिए। यदि कोई विशेष तांत्रिक अनुष्ठान करना चाहता है, तो उसे योग्य जानकार के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

निशिता काल में पूजा का विशेष फल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात निशिता काल में मां लक्ष्मी का स्मरण करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस समय की गई पूजा व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है और जीवन में सकारात्मकता लाने की प्रेरणा देती है। इस प्रकार दिवाली की रात निशिता काल केवल पूजा का समय नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का विशेष अवसर भी है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली की कामना की जाती है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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