facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  festivals›  chhoti diwali par maa kaali ki puja kyon ki jati hai janiye kaali chaudas ki kya hai manyata

Chhoti Diwali: छोटी दिवाली पर मां काली की पूजा क्यों की जाती है? जानें काली चौदस की मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Chhoti Diwali: छोटी दिवाली का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से भी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने देवताओं और मनुष्यों को परेशान कर रखा था। 

Chhoti Diwali
Chhoti Diwali: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन मां काली की पूजा करने की परंपरा है। खासतौर पर गुजरात और पश्चिम भारत में छोटी दिवाली को काली चौदस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां काली की आराधना करने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छोटी दिवाली पर मां काली की पूजा क्यों की जाती है और काली चौदस का क्या धार्मिक महत्व है? आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी मान्यताओं के बारे में।

काली चौदस क्यों मनाई जाती है?

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को काली चौदस मनाई जाती है। इसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां काली की पूजा करने से भय, नकारात्मकता और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। मां काली को शक्ति, साहस और बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन उनकी विशेष आराधना की जाती है। काली चौदस का पर्व विशेष रूप से गुजरात और पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में काफी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

मां काली की पूजा का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में मां काली को आदिशक्ति का उग्र स्वरूप माना गया है। उनका यह स्वरूप अधर्म, अन्याय और बुरी शक्तियों का नाश करने वाला है। धार्मिक मान्यता है कि मां काली की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है और उनके जीवन में साहस का संचार होता है। काली चौदस पर मां की आराधना करने का उद्देश्य जीवन से नकारात्मक विचारों और बुराइयों को दूर करना भी माना जाता है। भक्त इस दिन मां से परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं।

नरकासुर वध से भी जुड़ी है मान्यता

छोटी दिवाली का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से भी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने देवताओं और मनुष्यों को परेशान कर रखा था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई। इस घटना को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। हालांकि, काली चौदस की परंपरा में मां काली की आराधना का विशेष स्थान है और दोनों की धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग रूपों में प्रचलित हैं।

काली चौदस पर कैसे की जाती है पूजा?

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां काली की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। मां को फूल, धूप, दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मां काली के मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन विशेष रात्रि पूजा की भी परंपरा है। मान्यता है कि मां की आराधना करते समय मन में किसी के प्रति बुरा भाव नहीं रखना चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए।

काली चौदस पर दीपदान का महत्व

काली चौदस पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है। इस दिन दीपदान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर मां की कृपा बनी रहती है। यही वजह है कि छोटी दिवाली पर मां काली की पूजा के साथ दीपदान को भी विशेष महत्व दिया जाता है।


यह भी पढ़ें-

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा 

Narak Chaturdashi 2026: कब है नरक चतुर्दशी? जानें छोटी दिवाली की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व 

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानें इसका महत्व और परंपरा 
 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel