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Bhai Dooj : भाई दूज कब है जानिए तिथि और तिलक करने का शुभ मुहूर्त क्या है

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Bhai Dooj : भाई दूज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार के समापन का प्रतीक है

bhai dooj
Bhai Dooj : भाई दूज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार के समापन का प्रतीक है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। इस दिन यमुना नदी में पवित्र स्नान करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ऐसा माना जाता है कि जो भाई-बहन इस दिन यमुना में स्नान करते हैं उनके सभी पाप धुल जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस साल भाई दूज कब है और पूजा-पाठ के लिए शुभ समय  क्या है।

भाई दूज 2026: तारीख और शुभ समय

भाई दूज का पवित्र त्योहार 11 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पूजा-पाठ करने का शुभ समय दोपहर 01:10 बजे से लेकर दोपहर 03:20 बजे तक रहेगा। द्वितीया तिथि 10 नवंबर 2026 को दोपहर 02:00 बजे शुरू होगी और 11 नवंबर 2026 को दोपहर 03:53 बजे समाप्त होगी।

भाई दूज की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

भाई दूज की पूजा के लिए आपको इन चीजों की आवश्यकता होगी पूजा की थाली, एक दीया, अक्षत , फल, फूल, मिठाइयां, देसी घी, एक पूरा सूखा नारियल (गोला) और पानी।

भाई दूज की पूजा विधि

भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठें, शरीर पर तेल या उबटन लगाएं और स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनें।
निर्धारित पूजा विधि के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा करें। तिलक समारोह के लिए एक पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें हल्दी, कुमकुम, अक्षत और एक दीया रखें।
इस थाली को देवी-देवताओं के चरणों में रखें।
अपने भाई को एक चौकी  पर बैठाएं। भाई को अपना सिर किसी रुमाल या साफ कपड़े से ढक लेना चाहिए।
भाई के माथे पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत से तिलक लगाएं। इसके बाद, भाई की कलाई पर कलावा  बांधें।
फिर, अपने भाई को एक साबुत सूखा नारियल दें। (अगर आपके परिवार में भाई दूज पर सूखा नारियल देने की परंपरा है, तो कलावा बांधने के बाद ऐसा जरूर करें। अगर ऐसी कोई परंपरा नहीं है, तो आप इसे छोड़ सकती हैं।)
इसके बाद अपने भाई की आरती उतारें।
इसके बाद बहन अपने भाई को कुछ मीठा खिलाए।
फिर भाई अपनी बहन को कोई उपहार दे।
इस दिन भाई-बहन को एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए।
अगर बहन विवाहित है तो भाई को भाई दूज मनाने के लिए उसके घर जाना चाहिए।

भाई दूज की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन यमराज  अपनी बहन यमुना के घर गए थे। कहा जाता है कि यम और यमुना सूर्य देव की संतानें थीं। यमुना ने कई बार अपने भाई को आमंत्रित किया था लेकिन व्यस्त रहने के कारण यमराज नहीं आ पाए। आखिरकार एक दिन वे अपनी बहन के घर पहुँच ही गए। यमुना ने बहुत प्रेम से उन्हें भोजन कराया, उनके माथे पर तिलक लगाया और उनकी खुशी व समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे कोई वरदान माँगने को कहा। यमुना ने इच्छा जताई कि वे हर साल इसी दिन उनके घर आएँ, और जो भी बहन इस दिन अपने भाई को तिलक लगाए उसे मृत्यु या यम का भय न रहे. यमराज ने उसकी यह बात स्वीकार कर आशीर्वाद दिया तभी से इस पर्व को “भाई दूज” या “यम द्वितीया” के रूप में मनाया जाने लगा.

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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