Ashada Maas: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह माह भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी-देवताओं की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी महीने देवशयनी एकादशी आती है, जिसके बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। आषाढ़ माह में पूजा-पाठ, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष फल बताया गया है। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे माह में कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि आषाढ़ माह में क्या करना चाहिए और किन कार्यों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
आषाढ़ माह में क्या करें
भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें- आषाढ़ माह में प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें। वहीं भगवान शिव का जल, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म से अभिषेक करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
गीता, विष्णु सहस्रनाम और शिवपुराण का पाठ करें- धार्मिक मान्यता के अनुसार इस माह में श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम, शिव चालीसा, शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। जो लोग नियमित रूप से इनका पाठ नहीं कर सकते, वे प्रतिदिन कुछ श्लोक या स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।
दान-पुण्य का विशेष महत्व- आषाढ़ माह में अन्न, जल, वस्त्र, छाता, जूते-चप्पल, फल और जरूरतमंदों को दक्षिणा देने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में श्रद्धापूर्वक किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है।
तुलसी की सेवा करें- भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए आषाढ़ माह में प्रतिदिन तुलसी की पूजा करना, दीपक जलाना और जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। तुलसी के समीप भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप भी विशेष फलदायी माना गया है।
सात्विक भोजन ग्रहण करें- इस माह में सात्विक भोजन करने की परंपरा है। तामसिक भोजन, मदिरा और मांसाहार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। संयमित जीवनशैली अपनाकर धार्मिक कार्यों में मन लगाने का विशेष महत्व बताया गया है।
व्रत और उपवास का पालन करें- आषाढ़ माह में आने वाली एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा और अमावस्या जैसे पर्वों पर श्रद्धानुसार व्रत रखने की परंपरा है। व्रत के दौरान नियमों का पालन करते हुए भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
आषाढ़ माह में क्या नहीं करना चाहिए
तामसिक भोजन का सेवन न करें- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ माह में मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। इस दौरान सात्विक भोजन को ही प्राथमिकता देना उचित माना गया है।
किसी का अपमान न करें- इस माह में माता-पिता, गुरु, ब्राह्मण, संत और बुजुर्गों का अनादर करने से बचना चाहिए। कटु वचन बोलना, झूठ बोलना और दूसरों का अपमान करना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना गया है।
तुलसी के पत्ते बिना नियम के न तोड़ें- तुलसी दल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष तिथियों और संध्या के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। आवश्यकता होने पर सुबह स्नान के बाद ही श्रद्धापूर्वक तुलसी दल तोड़ना उचित माना गया है।
पूजा-पाठ में लापरवाही न करें- यदि आपने इस माह में किसी व्रत या पूजा का संकल्प लिया है, तो उसे बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता। नियमित रूप से पूजा, दीपदान और मंत्र जाप करने का प्रयास करना चाहिए।
क्रोध और विवाद से बचें- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ माह में क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और अनावश्यक विवाद से दूर रहना चाहिए। घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और मधुर व्यवहार करने को शुभ माना गया है।
पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं- आषाढ़ माह वर्षा ऋतु का आरंभिक समय होता है। धार्मिक परंपराओं में इस दौरान वृक्षों और पौधों की रक्षा करना पुण्य का कार्य माना गया है। बिना आवश्यकता पेड़ों की कटाई या पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
असत्य और छल-कपट से दूर रहें- धार्मिक ग्रंथों में इस माह के दौरान सत्य का पालन करने और ईमानदार आचरण रखने का विशेष महत्व बताया गया है। किसी के साथ धोखा, छल या अन्याय करना अशुभ माना गया है।
आषाढ़ माह में विशेष रूप से रखें इन बातों का ध्यान
आषाढ़ माह में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल की नियमित सफाई करें और प्रतिदिन दीपक जलाएं। घर में भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। यथाशक्ति दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। इस माह में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और सत्संग में भाग लेना भी शुभ माना जाता है।
चातुर्मास की शुरुआत से पहले रखें विशेष सावधानी