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Akshaya Tritiya 2025: साल 2025 में कब मनाई जाएगी अक्षय तृतीया, जानें सोना खरीने का शुभ मुहूर्त

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Akshaya Tritiya 2025 kab hai : अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया दान-पुण्य व्यर्थ नहीं जाता। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।

Akshaya Tritiya 2025
Akshaya Tritiya 2025 kab hai : अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया दान-पुण्य व्यर्थ नहीं जाता। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन नया काम शुरू करना शुभ माना जाता है। ऐसे में आज इस खबर में जानेंगे कि साल 2025 में अक्षय तृतीया कब है। इसके साथ ही इसका शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है। 

अक्षय तृतीया कब मनाई जाएगी 

तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5.32 बजे से शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2.13 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी। उदया तिथि होने के कारण अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन अबूझ मुहूर्त है, इसलिए किसी भी समय कोई भी काम शुरू किया जा सकता है। सोना, प्रॉपर्टी या वाहन खरीदा जा सकता है। शास्त्रों में इसे युगादि तिथि कहा गया है, अर्थात इस दिन युग का प्रारंभ हुआ था, इसलिए इस दिन कोई मुहूर्त दोष नहीं है।

अक्षय तृतीया का मुहूर्त क्या है?

भले ही अक्षय तृतीया दोपहर 2.13 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि होने के कारण पूरे दिन अक्षय तृतीया का महत्व रहेगा। इसके कारण आप पूरे दिन खरीदारी या नया काम शुरू कर सकते हैं। लेकिन शुभ मुहूर्त दोपहर 2.13 बजे तक है। ऐसे में 30 अप्रैल को दोपहर 2.13 बजे से पहले धार्मिक कार्य, खरीदारी, दान और नया काम शुरू करना श्रेष्ठ रहेगा।

अक्षय तृतीया का महत्व

मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। इसी दिन से सत्ययुग, द्वापरयुग और त्रेतायुग की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के दशावतार के छठे स्वरूप भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसी तरह उत्तराखंड में स्थित चारों धामों की यात्रा भी अक्षय तृतीया के दिन से ही शुरू होती है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर शुरू किए गए कामों में कई गुना वृद्धि होती है। इसी तरह इस दिन पाप कर्म भी नहीं करने चाहिए। जिस तरह पुण्य कर्मों का क्षय नहीं होता, उसी तरह पाप कर्म भी व्यक्ति के साथ नहीं रहते।

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