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Yoga for Lungs: सांस फूलने की समस्या में फायदेमंद हो सकते हैं ये योगासन, जानें सही तरीका और लाभ

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Yoga for Lungs: भुजंगासन फेफड़ों के लिए सबसे लाभकारी योगासनों में से एक माना जाता है। इस आसन में छाती पूरी तरह खुलती है, जिससे श्वसन क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों में हवा का प्रवाह बढ़ता है।

Yoga for Lungs
Yoga for Lungs: आजकल बदलती जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण, धूल-मिट्टी, धूम्रपान, एलर्जी और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कई लोगों को सांस फूलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सीढ़ियां चढ़ते समय, तेज चलने या हल्का-सा शारीरिक काम करने पर भी सांस उखड़ने लगती है। हालांकि, अगर यह समस्या किसी गंभीर फेफड़ों या हृदय संबंधी बीमारी से जुड़ी हो तो डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी होता है, लेकिन सामान्य स्थिति में नियमित योगाभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

योग में ऐसे कई आसन हैं जो छाती को फैलाने, फेफड़ों तक ऑक्सीजन की बेहतर आपूर्ति करने और सांस लेने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाने में सहायक माने जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रभावी योगासनों के बारे में।

भुजंगासन

भुजंगासन फेफड़ों के लिए सबसे लाभकारी योगासनों में से एक माना जाता है। इस आसन में छाती पूरी तरह खुलती है, जिससे श्वसन क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों में हवा का प्रवाह बढ़ता है।

भुजंगासन करने का सही तरीका
सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस अंदर लेते हुए हाथों के सहारे शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं। गर्दन को हल्का पीछे की ओर ले जाएं और सामने की ओर देखें। इस अवस्था में 15 से 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते रहें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस शुरुआती स्थिति में आ जाएं।

भुजंगासन के लाभ
इस आसन से छाती का विस्तार होता है, जिससे फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है। यह श्वसन मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और सांस लेने की प्रक्रिया को सहज बनाता है। लंबे समय तक नियमित अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता में सुधार देखने को मिल सकता है।

सेतु बंधासन

सेतु बंधासन में छाती ऊपर की ओर उठती है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। यह आसन सांस लेने की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में ऑक्सीजन के संचार को भी बेहतर बनाता है।

सेतु बंधासन करने का सही तरीका
पीठ के बल सीधा लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को कूल्हों के पास रखें। दोनों हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए कमर और छाती को ऊपर उठाएं। कंधे और सिर जमीन पर टिके रहें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य गति से सांस लेते रहें। फिर धीरे-धीरे शरीर को नीचे ले आएं।

सेतु बंधासन के लाभ
यह आसन फेफड़ों और छाती की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। नियमित अभ्यास से सांस लेने में आसानी महसूस हो सकती है। साथ ही शरीर में रक्त संचार भी बेहतर होता है, जिससे पूरे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में सहायता मिलती है।

मत्स्यासन

मत्स्यासन को छाती खोलने वाला प्रमुख योगासन माना जाता है। इस आसन में फेफड़ों का विस्तार अधिक होता है, जिससे गहरी सांस लेने में मदद मिलती है।

मत्स्यासन करने का सही तरीका
पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे अपनी कोहनियों का सहारा लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं। सिर के ऊपरी हिस्से को हल्के से जमीन पर टिकाएं। इस दौरान छाती पूरी तरह ऊपर उठी रहे। सामान्य गति से सांस लेते हुए 20 सेकंड तक इस अवस्था में रहें। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।

मत्स्यासन के लाभ
यह आसन फेफड़ों के विस्तार में मदद करता है और श्वसन प्रणाली को सक्रिय बनाता है। जिन लोगों को हल्की सांस फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए नियमित अभ्यास लाभदायक माना जाता है। इससे छाती की जकड़न कम करने में भी सहायता मिल सकती है।

अर्ध चक्रासन

अर्ध चक्रासन शरीर के आगे वाले हिस्से को फैलाता है और छाती को पूरी तरह खोलने का काम करता है। इससे फेफड़ों में हवा का प्रवेश बेहतर तरीके से हो पाता है।

अर्ध चक्रासन करने का सही तरीका
सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। दोनों हाथों को कमर पर रखें। अब सांस लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाएं। गर्दन को आरामदायक स्थिति में रखें और कुछ सेकंड तक सामान्य सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे वापस सीधी अवस्था में आ जाएं।

अर्ध चक्रासन के लाभ
यह आसन फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है। छाती की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और श्वसन प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। नियमित अभ्यास से सांस लेने में आसानी महसूस हो सकती है।

गोमुखासन

गोमुखासन केवल कंधों और पीठ के लिए ही नहीं, बल्कि श्वसन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इस आसन में छाती का विस्तार होता है और फेफड़ों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

गोमुखासन करने का सही तरीका
जमीन पर बैठकर एक पैर को दूसरे पैर के ऊपर मोड़ लें। अब एक हाथ को ऊपर से और दूसरे हाथ को नीचे से पीछे ले जाकर दोनों हाथों की उंगलियों को पकड़ने की कोशिश करें। पीठ सीधी रखें और सामान्य गति से सांस लेते रहें। 20 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद दूसरी तरफ से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

गोमुखासन के लाभ
यह आसन छाती को खोलने में मदद करता है और फेफड़ों तक ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाता है। कंधों और ऊपरी पीठ में जकड़न कम होने से सांस लेने में भी आसानी महसूस हो सकती है।

योग करते समय रखें इन बातों का ध्यान

योगाभ्यास हमेशा खाली पेट या भोजन के कम से कम तीन घंटे बाद करें। सांस फूलने की समस्या यदि लंबे समय से बनी हुई है, बार-बार खांसी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन का स्तर कम होना या किसी फेफड़ों की बीमारी जैसे अस्थमा, सीओपीडी या अन्य गंभीर समस्या है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। योग करते समय सांस को रोकने की कोशिश न करें और हर आसन अपनी क्षमता के अनुसार करें। यदि किसी भी आसन के दौरान चक्कर आए, सांस ज्यादा फूलने लगे या असहजता महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें।


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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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