Yoga Tips: फेफड़े हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग हैं, जो शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने का काम करते हैं। बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी, धूम्रपान, निष्क्रिय जीवनशैली और बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नियमित योगाभ्यास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने, श्वास को बेहतर बनाने और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में मददगार माना जाता है।
कुछ विशेष योगासन और उनके साथ नियंत्रित श्वास का अभ्यास फेफड़ों के विस्तार में सहायता करता है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा, सीओपीडी, गंभीर फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो किसी भी योगासन की शुरुआत विशेषज्ञ की सलाह से ही करनी चाहिए।
भुजंगासन
भुजंगासन छाती को फैलाने और श्वास लेने की क्षमता को बेहतर बनाने वाले प्रमुख योगासनों में से एक माना जाता है। इस आसन में छाती खुलती है, जिससे फेफड़ों को अधिक विस्तार मिलने में मदद मिलती है।
कैसे करें
- पेट के बल सीधा लेट जाएं।
- दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें।
- गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर, गर्दन और छाती को ऊपर उठाएं।
- कमर पर अधिक दबाव न डालें और कंधों को ढीला रखें।
- सामान्य गति से सांस लेते हुए 15 से 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें।
- सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
- इस प्रक्रिया को 3 से 5 बार दोहराया जा सकता है।
मत्स्यासन
मत्स्यासन छाती और फेफड़ों को फैलाने वाला प्रभावी योगासन माना जाता है। यह श्वसन मार्ग को खुला रखने और गहरी सांस लेने में सहायता कर सकता है।
कैसे करें
- पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
- दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथों को शरीर के नीचे रखें।
- कोहनियों का सहारा लेकर छाती को ऊपर उठाएं।
- सिर को पीछे ले जाकर सिर का ऊपरी हिस्सा हल्के से जमीन पर टिकाएं।
- गहरी और धीमी सांस लेते हुए 20 से 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।
- धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
सेतु बंधासन
सेतु बंधासन छाती, कंधों और फेफड़ों को फैलाने में मदद करता है। इस आसन के दौरान श्वसन प्रक्रिया अधिक सक्रिय होती है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
कैसे करें
- पीठ के बल लेट जाएं।
- घुटनों को मोड़कर पैरों को जमीन पर रखें।
- दोनों हाथ शरीर के बगल में रखें।
- सांस लेते हुए कमर और छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- शरीर को कंधों से घुटनों तक सीधी रेखा में रखने का प्रयास करें।
- 20 से 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते रहें।
- धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाकर विश्राम करें।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
यह योगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ-साथ छाती और पसलियों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे श्वास लेने की प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है।
कैसे करें
- जमीन पर दोनों पैर फैलाकर बैठ जाएं।
- दाएं पैर को मोड़कर बाएं घुटने के बाहर रखें।
- बाएं पैर को मोड़कर दाएं कूल्हे के पास रखें।
- बाएं हाथ से दाएं घुटने को पकड़ें और शरीर को दाईं ओर मोड़ें।
- दाएं हाथ को पीछे जमीन पर रखें।
- सामान्य श्वास लेते हुए 20 से 30 सेकंड तक रुकें।
- दूसरी ओर भी इसी प्रकार दोहराएं।
गोमुखासन
गोमुखासन छाती और कंधों को खोलने में मदद करता है। जिन लोगों की जीवनशैली लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली है, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे शरीर का ऊपरी भाग सक्रिय होता है।
कैसे करें
- जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को मोड़ें।
- एक घुटने को दूसरे के ऊपर रखें।
- एक हाथ को ऊपर से और दूसरे हाथ को नीचे से पीछे ले जाकर उंगलियों को आपस में मिलाने का प्रयास करें।
- छाती को सीधा रखें और गहरी सांस लें।
- 20 से 30 सेकंड तक रुकने के बाद दूसरी ओर से भी यही प्रक्रिया करें।
इन योगासनों का अभ्यास करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- योग हमेशा खाली पेट या भोजन के कम से कम तीन घंटे बाद करें।
- अभ्यास के दौरान सांस को रोकने की बजाय सामान्य और गहरी सांस लेते रहें।
- किसी भी आसन में शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।
- यदि चक्कर आए, सांस लेने में तकलीफ हो या दर्द महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें।
- शुरुआत में प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना अधिक सुरक्षित रहता है।
- फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी या संक्रमण होने पर डॉक्टर की सलाह के बाद ही योग करें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
योगासन तभी अधिक प्रभावी हो सकते हैं जब उनके साथ स्वस्थ जीवनशैली भी अपनाई जाए। धूम्रपान से दूरी बनाना, प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क का उपयोग करना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित आहार लेना फेफड़ों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा रोजाना कुछ समय गहरी और नियंत्रित श्वास का अभ्यास करने से भी श्वसन क्षमता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।