Sleep Yoga: आधुनिक जीवनशैली, देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत और मानसिक तनाव के कारण बहुत से लोगों को गहरी और आरामदायक नींद नहीं मिल पाती। रात में सोने से पहले कुछ हल्के और शांत योगासन करने से शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है, मन शांत होता है और नींद आने की प्रक्रिया सहज बनती है। खास बात यह है कि रात में किए जाने वाले योगासन ऊर्जा बढ़ाने वाले नहीं, बल्कि शरीर और मन को विश्राम देने वाले होने चाहिए। सोने से लगभग 20 से 30 मिनट पहले किए गए कुछ सरल आसन और श्वास अभ्यास शरीर को आराम की अवस्था में ले जाते हैं। इससे बेचैनी, तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
बालासन से मन को मिलता है आराम
रात में किए जाने वाले सबसे प्रभावी योगासनों में बालासन को माना जाता है। इस आसन में घुटनों के बल बैठकर शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है और माथा जमीन पर टिकाया जाता है। दोनों हाथ आगे की ओर फैला सकते हैं या शरीर के पास रख सकते हैं। इस स्थिति में धीमी और गहरी सांस लेते हुए 1 से 2 मिनट तक रहें। बालासन पीठ, कंधों और गर्दन के तनाव को कम करता है। दिनभर की थकान के बाद यह आसन शरीर को विश्राम देने में मदद करता है और मन को शांत करने में सहायक माना जाता है।
मार्जारी-व्याघ्रासन से कम होती है जकड़न
यदि लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण पीठ में जकड़न रहती है तो सोने से पहले मार्जारी-व्याघ्रासन किया जा सकता है। इसके लिए दोनों हाथ और घुटनों के बल आएं। सांस लेते हुए कमर को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को अंदर की ओर ले आएं। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार धीरे-धीरे दोहराने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और पीठ की अकड़न कम हो सकती है।
विपरीत करनी आसन रात के लिए लाभकारी
दीवार के सहारे किया जाने वाला विपरीत करनी आसन भी अच्छी नींद के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर पैरों को दीवार पर ऊपर की ओर टिकाया जाता है। हाथ शरीर के पास आराम से रखें और आंखें बंद कर लें। इस आसन में 3 से 5 मिनट तक रहने से पैरों की थकान कम होती है, रक्त संचार संतुलित होता है और शरीर को आराम महसूस हो सकता है। कई योग प्रशिक्षक इसे रात के समय किए जाने वाले श्रेष्ठ विश्राम आसनों में शामिल करते हैं।
सुप्त बद्ध कोणासन से शरीर को मिलता है विश्राम
यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जिन्हें तनाव या बेचैनी के कारण नींद नहीं आती। इसके लिए पीठ के बल लेट जाएं, दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं और घुटनों को बाहर की ओर गिरने दें। हाथों को आराम से रखें और सामान्य श्वास लेते रहें। लगभग 2 से 3 मिनट तक इस स्थिति में रहने से शरीर ढीला पड़ने लगता है और मानसिक तनाव कम महसूस हो सकता है।
शवासन से गहरी शांति का अनुभव
रात के योग अभ्यास का अंतिम चरण शवासन होना चाहिए। पीठ के बल सीधा लेट जाएं, दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें। आंखें बंद करके पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। सांस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें, केवल उसके आने-जाने पर ध्यान दें। योग विशेषज्ञों के अनुसार 5 मिनट तक शवासन करने से शरीर की मांसपेशियां शिथिल होती हैं और मन विश्राम की अवस्था में पहुंचता है, जिससे नींद आने में आसानी हो सकती है।
रात में योग करते समय सही तरीका
रात में योग अभ्यास करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। भोजन के तुरंत बाद योग नहीं करना चाहिए। हल्का भोजन करने के कम से कम 2 घंटे बाद अभ्यास करना बेहतर माना जाता है। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक होना चाहिए। तेज रोशनी या मोबाइल स्क्रीन से दूरी बनाकर अभ्यास करने से अधिक लाभ मिल सकता है। रात के समय तेज गति वाले या अत्यधिक श्रम वाले योगासन करने से बचना चाहिए। योग अभ्यास धीमी गति से और बिना जोर लगाए करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
अच्छी नींद के लिए श्वास अभ्यास भी उपयोगी
योगासन के साथ गहरी श्वास का अभ्यास करने से भी नींद में सहायता मिल सकती है। आरामदायक स्थिति में बैठकर या लेटकर धीरे-धीरे सांस लें और उससे थोड़ा अधिक समय लेकर सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 10 से 15 बार दोहराने से मन की गति धीमी हो सकती है और शरीर को विश्राम का संकेत मिलता है।
किसे सावधानी बरतनी चाहिए
जिन लोगों को गंभीर कमर दर्द, रीढ़ की समस्या, घुटनों की चोट, उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर चिकित्सकीय समस्याएं हैं, उन्हें किसी भी योगासन को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। यदि किसी आसन के दौरान दर्द या असुविधा महसूस हो तो अभ्यास तुरंत रोक देना चाहिए।
रात में योग से मिलने वाले प्रमुख लाभ
नियमित रूप से रात में हल्के योगासन करने से शरीर की थकान कम हो सकती है, मांसपेशियों में आराम मिलता है, मानसिक तनाव घटता है और सोने की तैयारी स्वाभाविक रूप से होने लगती है। योग प्रशिक्षकों का मानना है कि बालासन, विपरीत करनी, सुप्त बद्ध कोणासन और शवासन जैसे शांत आसनों का नियमित अभ्यास नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)