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High BP Yoga: हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए करें ये योगासन, जानें सही तरीका और फायदे

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

High BP Yoga: नियमित रूप से कुछ विशेष योगासन करने से तनाव कम होता है, सांसों की गति संतुलित होती है और रक्त प्रवाह बेहतर हो सकता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।

High BP Yoga
High BP Yoga: आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अनियमित दिनचर्या, तनाव, पर्याप्त नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार भी रक्तचाप को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग को ऐसी प्राकृतिक पद्धति माना जाता है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने में मदद करती है। नियमित रूप से कुछ विशेष योगासन करने से तनाव कम होता है, सांसों की गति संतुलित होती है और रक्त प्रवाह बेहतर हो सकता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।

वज्रासन

वज्रासन एक सरल और सुरक्षित योगासन माना जाता है। इस आसन में बैठने से शरीर स्थिर रहता है और मानसिक तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसे करने के लिए घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें, दोनों हाथ घुटनों पर रखें और रीढ़ को सीधा रखें। सामान्य गति से सांस लेते हुए पांच से दस मिनट तक इस स्थिति में रहें। नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।

शशांकासन

शशांकासन को चाइल्ड पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर को गहरा आराम देता है और मानसिक दबाव को कम करने में मदद करता है। वज्रासन में बैठकर सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे झुकाएं, दोनों हाथ सामने फैलाएं और माथे को जमीन से लगाएं। कुछ सेकंड तक रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस आएं। यह आसन नर्वस सिस्टम को शांत करने और तनाव के कारण बढ़े रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है।

मकरासन

मकरासन हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद आरामदायक आसन माना जाता है। पेट के बल लेटकर दोनों कोहनियों को मोड़ें और हथेलियों पर ठोड़ी रखें। पैरों को थोड़ा फैलाकर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। धीमी और गहरी सांस लेते हुए कुछ मिनट तक इसी स्थिति में रहें। इससे शरीर की मांसपेशियों का तनाव कम होता है, हृदय की धड़कन शांत होती है और मानसिक बेचैनी घट सकती है।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन शरीर को स्ट्रेच करने के साथ मानसिक शांति देने वाला आसन माना जाता है। पैरों को सामने फैलाकर बैठें, हाथों को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे झुकें। बिना जोर लगाए जितना सहज हो उतना झुकें और कुछ सेकंड तक रुकें। इस आसन से तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है और तनाव कम होने में मदद मिल सकती है, जो हाई ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में सहायक होता है।

सेतु बंधासन

सेतु बंधासन छाती को खोलने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और सांस भरते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड तक स्थिति बनाए रखें और फिर धीरे-धीरे नीचे आ जाएं। इस आसन से शरीर में रक्त संचार बेहतर हो सकता है और तनाव कम करने में सहायता मिल सकती है।

शवासन

शवासन को योग के सबसे महत्वपूर्ण विश्राम आसनों में गिना जाता है। पीठ के बल सीधे लेटकर हाथों को शरीर से थोड़ा दूर रखें और आंखें बंद कर लें। पूरे शरीर को ढीला छोड़कर गहरी और धीमी सांस लें। पांच से दस मिनट तक इस स्थिति में रहने से मानसिक तनाव कम होता है, हृदय की धड़कन सामान्य होने लगती है और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

प्राणायाम भी है लाभकारी

योगासनों के साथ हल्के प्राणायाम करने से भी हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को फायदा हो सकता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम सांसों की लय को संतुलित करता है और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। भ्रामरी प्राणायाम में मधुमक्खी की गूंज जैसी ध्वनि निकाली जाती है, जिससे मन शांत होता है और तनाव घट सकता है।

योग करते समय रखें सावधानी

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को योग हमेशा खाली पेट या भोजन के कुछ घंटे बाद करना चाहिए। सांस रोककर रखने वाले अभ्यासों से बचना चाहिए और किसी भी आसन को जोर लगाकर नहीं करना चाहिए। यदि चक्कर, बेचैनी या अत्यधिक थकान महसूस हो तो अभ्यास तुरंत रोक देना चाहिए। जिन लोगों का रक्तचाप बहुत अधिक रहता है, उन्हें योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।

रोजाना कितना समय दें?

प्रतिदिन लगभग 20 से 30 मिनट तक हल्के योगासन और 10 मिनट तक प्राणायाम करना पर्याप्त माना जाता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम करने, नींद की गुणवत्ता सुधारने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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