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Meditation Tips: ध्यान करते समय नींद क्यों आने लगती है? जानिए आध्यात्मिक कारण

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Meditation Tips: आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारा मन पूरे दिन हजारों विचारों में उलझा रहता है। जब व्यक्ति पहली बार ध्यान में बैठता है तो धीरे-धीरे विचारों की गति कम होने लगती है। 

Meditation Tips: 
Meditation Tips: आज के समय में बड़ी संख्या में लोग मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए ध्यान का सहारा ले रहे हैं, लेकिन अक्सर एक बात लगभग हर साधक के साथ होती है कि जैसे ही वह ध्यान में बैठता है, कुछ ही मिनटों बाद आंखें भारी होने लगती हैं और नींद आने लगती है। कई लोग इसे अपनी कमजोरी या ध्यान करने में असफलता मान लेते हैं, जबकि आध्यात्मिक दृष्टि से इसके पीछे कुछ अलग कारण बताए गए हैं।

ध्यान के दौरान आने वाली नींद केवल शारीरिक थकान का संकेत नहीं मानी जाती, बल्कि कई आध्यात्मिक परंपराओं में इसे मन, चेतना और ऊर्जा की स्थिति से भी जोड़कर देखा जाता है। आखिर ध्यान लगाते ही ऐसा क्यों होता है? क्या यह सामान्य बात है या किसी विशेष अवस्था का संकेत? आइए जानते हैं...

ध्यान में बैठते ही मन शांत होने लगता है

आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारा मन पूरे दिन हजारों विचारों में उलझा रहता है। जब व्यक्ति पहली बार ध्यान में बैठता है तो धीरे-धीरे विचारों की गति कम होने लगती है। मन का यह शांत होना कई लोगों के लिए एक नई स्थिति होती है। चूंकि शरीर और मस्तिष्क पहले से ही आराम की अवस्था को नींद से जोड़कर देखते हैं, इसलिए जैसे ही मन शांत होता है, नींद आने लगती है। इसे कई गुरु ध्यान की शुरुआती अवस्था मानते हैं। यानी मन पहली बार गहरे शांत वातावरण का अनुभव करता है और उसी कारण शरीर विश्राम की ओर बढ़ जाता है।

तमोगुण का प्रभाव भी माना जाता है कारण

सनातन धर्म और योग दर्शन में मनुष्य के स्वभाव को तीन गुणों में बांटा गया है- सत्त्व, रज और तम।
तमोगुण को आलस्य, भारीपन और निद्रा का गुण माना गया है। यदि किसी व्यक्ति के भीतर तमोगुण की प्रधानता अधिक होती है तो ध्यान के समय उसकी चेतना ऊपर उठने के बजाय नींद की ओर झुक सकती है। आध्यात्मिक मान्यता है कि नियमित साधना, सात्विक जीवनशैली और संयमित दिनचर्या से धीरे-धीरे तमोगुण कम होने लगता है और ध्यान के दौरान सजगता बढ़ने लगती है।

ध्यान के दौरान ऊर्जा का संतुलन बदलने लगता है

योग और ध्यान की परंपरा में माना जाता है कि ध्यान करते समय शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा धीरे-धीरे संतुलित होने लगती है। जब लंबे समय से बिखरी हुई मानसिक ऊर्जा शांत होती है तो शरीर गहरे विश्राम का अनुभव करता है। इसी अवस्था में कई लोगों को नींद जैसा एहसास होता है। हालांकि आध्यात्मिक दृष्टि से यह हमेशा वास्तविक नींद नहीं होती, बल्कि शरीर और मन का गहरे विश्राम में जाना भी हो सकता है।

मन का पुराने संस्कारों से जुड़ाव

आध्यात्मिक ग्रंथों के अनुसार मन में अनेक पुराने संस्कार और आदतें छिपी होती हैं। यदि व्यक्ति का मन हमेशा भागदौड़, तनाव और बाहरी गतिविधियों में लगा रहा हो तो अचानक स्थिर बैठना उसके लिए सहज नहीं होता। ऐसी स्थिति में मन सजग रहने के बजाय आराम की ओर चला जाता है और व्यक्ति को नींद आने लगती है। इसे मन की पुरानी आदतों का प्रभाव भी माना जाता है।

क्या यह आध्यात्मिक प्रगति का संकेत है?

कई लोग यह मान लेते हैं कि ध्यान के दौरान नींद आना किसी बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि का संकेत है, लेकिन अधिकांश आध्यात्मिक आचार्य ऐसा नहीं मानते। उनके अनुसार यदि ध्यान के दौरान बार-बार गहरी नींद आने लगे और व्यक्ति सजग न रह पाए तो यह अभी साधना की प्रारंभिक अवस्था का संकेत हो सकता है। वास्तविक ध्यान में व्यक्ति पूरी तरह जागरूक रहता है। शरीर शांत होता है, लेकिन चेतना सक्रिय रहती है, इसलिए ध्यान का उद्देश्य सो जाना नहीं, बल्कि पूर्ण जागरूकता में रहना माना गया है।

नियमित अभ्यास से बदलती है स्थिति

आध्यात्मिक परंपराओं में कहा गया है कि ध्यान कोई एक दिन का अभ्यास नहीं है। नियमित रूप से साधना करने पर मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है। जब अभ्यास बढ़ता है तो वही व्यक्ति, जिसे पहले हर बार ध्यान में नींद आती थी, बाद में लंबे समय तक पूरी सजगता के साथ ध्यान कर पाता है। इसलिए शुरुआती दिनों की इस स्थिति को सामान्य माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान को क्यों दिया जाता है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त का समय ध्यान और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस समय वातावरण अपेक्षाकृत शांत होता है और मन भी अधिक स्थिर रहता है। मान्यता है कि इस समय सात्विक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है, जिससे ध्यान के दौरान सजग बने रहने में सहायता मिलती है। इसी कारण अनेक ऋषि-मुनि और संत ब्रह्म मुहूर्त में साधना करने पर विशेष बल देते रहे हैं।




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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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