Yoga Tips: योग केवल शरीर को सक्रिय बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्राचीन विधा भी है। अधिकतर लोग योगासन तो पूरे मन से करते हैं, लेकिन अंत में किए जाने वाले शवासन को साधारण विश्राम समझकर छोड़ देते हैं। जबकि योगशास्त्र में शवासन को उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है जितना किसी भी कठिन योगासन को। यही कारण है कि लगभग हर योग सत्र का समापन शवासन से किया जाता है।
योग करने के बाद शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है, मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और मन भी अलग अवस्था में पहुंचता है। ऐसे में शवासन शरीर और मन को सामान्य स्थिति में लाने का कार्य करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि योग के अंत में केवल शवासन ही क्यों कराया जाता है? क्या आपको पता है कि इसके पीछे योगशास्त्र में क्या महत्व बताया गया है? आइए जानते हैं।
योग के बाद शवासन क्या होता है?
शवासन दो शब्दों से मिलकर बना है- 'शव' और 'आसन'। इसमें साधक अपनी पीठ के बल पूरी तरह सीधा लेट जाता है। दोनों हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर रहते हैं, हथेलियां ऊपर की ओर खुली होती हैं और पैरों के बीच भी थोड़ा अंतर रखा जाता है। इस दौरान पूरे शरीर को ढीला छोड़ दिया जाता है और केवल श्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। योग के बाद इस आसन को इसलिए कराया जाता है, ताकि शरीर में उत्पन्न हुई थकान दूर हो सके और योगाभ्यास का पूरा लाभ शरीर को मिल सके।
योग के बाद शवासन करना क्यों जरूरी माना गया है?
योगाभ्यास के दौरान शरीर की मांसपेशियां लगातार सक्रिय रहती हैं। कई आसनों में शरीर को मोड़ना, झुकाना, संतुलन बनाना और खिंचाव देना पड़ता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर कार्य होता है। यदि इन आसनों के बाद तुरंत उठकर सामान्य काम करने लगें तो शरीर को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता। शवासन शरीर को यह अवसर देता है कि वह सभी योगासनों के प्रभाव को सहज रूप से स्वीकार कर सके। यही कारण है कि योग विशेषज्ञ भी किसी भी योग सत्र को शवासन के बिना अधूरा मानते हैं।
शरीर की थकान को कम करने में करता है मदद
योग करने के दौरान शरीर ऊर्जा खर्च करता है। चाहे योग हल्का हो या कठिन, मांसपेशियों पर उसका प्रभाव पड़ता है। शवासन शरीर को गहराई से विश्राम देता है, जिससे मांसपेशियों का तनाव कम होने लगता है। इसी कारण योगाभ्यास के बाद होने वाली सामान्य थकान भी कम महसूस होती है और शरीर दोबारा सामान्य अवस्था में लौट आता है।
शरीर की धड़कन और श्वास को सामान्य करने में सहायक
योगाभ्यास के दौरान कई बार सांस लेने का तरीका बदलता है और कुछ आसनों में हृदय गति भी सामान्य से तेज हो सकती है। शवासन के दौरान व्यक्ति बिना किसी तनाव के केवल सामान्य श्वास लेता है। धीरे-धीरे श्वास की गति संतुलित होती है और हृदय की धड़कन भी सामान्य होने लगती है। इसलिए योग समाप्त होने के बाद यह आसन शरीर को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मन को शांत करने में निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका
योग केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध मन से भी है। योगाभ्यास के बाद शवासन करने से मन को शांत होने का समय मिलता है। इस दौरान व्यक्ति कुछ मिनटों तक बिना किसी शारीरिक गतिविधि के केवल श्वास पर ध्यान देता है। इससे मानसिक तनाव कम होने लगता है और मन अधिक स्थिर महसूस करता है।
योग से प्राप्त लाभों को बनाए रखने में करता है मदद
योगशास्त्र के अनुसार प्रत्येक योगासन का शरीर पर अलग प्रभाव पड़ता है। शवासन इन सभी प्रभावों को संतुलित करने का कार्य करता है। जब शरीर पूरी तरह शांत अवस्था में पहुंचता है, तब योगाभ्यास के दौरान प्राप्त सकारात्मक प्रभाव शरीर में बेहतर तरीके से समाहित होने लगते हैं। इसी कारण शवासन को योग का अंतिम और आवश्यक चरण माना गया है।
तंत्रिका तंत्र को आराम देने में सहायक
लगातार शारीरिक गतिविधियों के कारण तंत्रिका तंत्र भी सक्रिय रहता है। शवासन के दौरान शरीर पूरी तरह स्थिर हो जाता है, जिससे तंत्रिका तंत्र को भी विश्राम मिलता है। यही कारण है कि शवासन के बाद व्यक्ति पहले की तुलना में अधिक हल्का और आरामदायक महसूस करता है।
एकाग्रता बढ़ाने में भी माना जाता है उपयोगी
शवासन करते समय आंखें बंद रखकर केवल श्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे मन धीरे-धीरे इधर-उधर भटकना कम करता है और एकाग्रता बढ़ने लगती है। योगाभ्यास के बाद यह प्रक्रिया मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक मानी जाती है।
शवासन कितनी देर करना चाहिए?
योग विशेषज्ञ सामान्यतः योगाभ्यास के बाद कम से कम 5 से 10 मिनट तक शवासन करने की सलाह देते हैं। यदि योग का अभ्यास अधिक समय तक किया गया हो या कठिन आसन किए गए हों, तो शवासन की अवधि थोड़ी बढ़ाई भी जा सकती है। इस दौरान किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर सामान्य श्वास लेते हुए शांत बने रहना ही इस आसन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।
शवासन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
शवासन करते समय शरीर को बिल्कुल सीधा रखें और किसी भी अंग में अनावश्यक तनाव न रखें। आंखें बंद रखें, सांस को सामान्य रहने दें और पूरे शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। इस दौरान बातचीत, मोबाइल देखने या बार-बार शरीर को हिलाने से बचना चाहिए। यदि संभव हो तो शांत और स्वच्छ स्थान पर शवासन करें, ताकि मन और शरीर दोनों को पूरा विश्राम मिल सके।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)