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Yoga Tips: योग करते समय गहरी सांस लेना क्यों माना जाता है सबसे जरूरी? जानिए इसका महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Yoga Tips: गहरी सांस लेने का मतलब केवल ज्यादा हवा अंदर लेना नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे, नियंत्रित और पूरी क्षमता के साथ सांस अंदर लेना और उतनी ही सहजता से बाहर छोड़ना होता है। 

Yoga Tips
Yoga Tips: आज के समय में योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और श्वास संबंधी संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी अभ्यास बन चुका है। योग विशेषज्ञ हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी योगासन को सही तरीके से करने के लिए जितना जरूरी शरीर की मुद्रा होती है, उतनी ही जरूरी सही तरीके से सांस लेना भी होता है। कई लोग योग करते समय केवल आसनों पर ध्यान देते हैं, लेकिन सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं देते, जिससे उन्हें योग का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

योग में गहरी और नियंत्रित सांस लेने को शरीर और मन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। यही कारण है कि लगभग हर योगासन और प्राणायाम में श्वास का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि योग करते समय गहरी सांस लेने पर इतना जोर क्यों दिया जाता है? क्या आपको पता है कि इसका शरीर और योग अभ्यास पर क्या असर पड़ता है? आइए जानते हैं।

योग में गहरी सांस लेने का क्या अर्थ है?

गहरी सांस लेने का मतलब केवल ज्यादा हवा अंदर लेना नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे, नियंत्रित और पूरी क्षमता के साथ सांस अंदर लेना और उतनी ही सहजता से बाहर छोड़ना होता है। योग में इसे जागरूक श्वास कहा जाता है। इस दौरान सांस केवल छाती तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पेट और फेफड़ों के निचले हिस्से तक पहुंचती है। जब व्यक्ति इस प्रकार सांस लेता है तो शरीर को अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है और श्वास की गति भी सामान्य बनी रहती है।

योग के दौरान शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है

योगासन करते समय शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। ऐसे में उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। गहरी सांस लेने से फेफड़ों तक ज्यादा हवा पहुंचती है, जिससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर बना रहता है। पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने से शरीर की कोशिकाएं बेहतर तरीके से काम करती हैं और योगासन करते समय थकान भी कम महसूस होती है। यही कारण है कि योग प्रशिक्षक हर आसन के साथ सांस की प्रक्रिया को जोड़कर सिखाते हैं।

हर योगासन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है

योग केवल शरीर को मोड़ने या खींचने का अभ्यास नहीं है। इसमें संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी होता है। जब व्यक्ति गहरी और नियंत्रित सांस लेता है तो शरीर अधिक स्थिर रहता है। कई संतुलन वाले आसनों जैसे वृक्षासन, गरुड़ासन या नटराजासन में यदि सांस तेज या अनियमित हो जाए तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं, नियंत्रित श्वास शरीर को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।

मांसपेशियों में तनाव कम करने में सहायक

योगासन के दौरान कई बार शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खिंचाव महसूस होता है। यदि इस दौरान सांस रोक ली जाए तो मांसपेशियों में तनाव और बढ़ सकता है। इसके विपरीत, गहरी सांस लेने से शरीर रिलैक्स रहता है और मांसपेशियां धीरे-धीरे खिंचाव को स्वीकार करती हैं। इससे आसन अधिक सहजता से किया जा सकता है और शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

योग अभ्यास के दौरान एकाग्रता बढ़ती है

योग में शरीर और मन दोनों का एक साथ सक्रिय होना जरूरी माना जाता है। जब व्यक्ति अपनी सांस पर ध्यान देता है तो उसका ध्यान इधर-उधर भटकने के बजाय वर्तमान अभ्यास पर केंद्रित रहता है। इसी कारण कई योग प्रशिक्षक आसन करते समय सांस की गिनती करने या श्वास की गति पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। इससे अभ्यास अधिक प्रभावी बनता है और मन भी शांत बना रहता है।

आसनों को लंबे समय तक करने में आसानी होती है

कुछ योगासन ऐसे होते हैं जिन्हें कुछ सेकंड या एक मिनट तक स्थिर होकर करना पड़ता है। यदि इस दौरान सांस सामान्य और गहरी बनी रहे तो शरीर पर दबाव कम महसूस होता है, लेकिन यदि व्यक्ति सांस रोक ले या बहुत तेज सांस लेने लगे तो जल्दी थकान महसूस होने लगती है और आसन को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए गहरी सांस योग अभ्यास की अवधि को सहज बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शरीर की ऊर्जा का बेहतर उपयोग होता है

योग के दौरान शरीर लगातार काम कर रहा होता है। ऐसे में सही श्वास लेने से ऊर्जा का संतुलित उपयोग होता है। गहरी सांस शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाती है, जिससे ऊर्जा का स्तर बेहतर बना रहता है। इसी वजह से योग अभ्यास के बाद कई लोग खुद को पहले की तुलना में अधिक ताजगी और हल्कापन महसूस करते हैं।

प्राणायाम की नींव भी है सही श्वास

योग का एक महत्वपूर्ण भाग प्राणायाम है और इसका पूरा आधार ही श्वास पर टिका होता है। यदि व्यक्ति सामान्य योगासन करते समय ही सही तरीके से गहरी सांस लेने की आदत विकसित कर लेता है तो प्राणायाम का अभ्यास भी अधिक सहज हो जाता है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी, नाड़ी शोधन और कपालभाति जैसे प्राणायाम में श्वास का सही नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए योग की शुरुआत से ही सांस लेने की सही तकनीक पर ध्यान देना जरूरी होता है।



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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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