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Saptarshi Story: कौन हैं सप्तऋषि? जानिए इन महान ऋषियों की दिव्य गाथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Saptarshi Story: प्राचीन काल में सात ऋषियों का एक समूह था जिन्हें सप्तर्षि कहा जाता था। वेदों में इन सात ऋषियों को वैदिक धर्म का रक्षक माना जाता है। इन ऋषियों के नामों से ही कुलों के नाम भी निकले हैं।

Saptarshi Story
Saptarshi Story: प्राचीन काल में सात ऋषियों का एक समूह था जिन्हें सप्तर्षि कहा जाता था। वेदों में इन सात ऋषियों को वैदिक धर्म का रक्षक माना जाता है। इन ऋषियों के नामों से ही कुलों के नाम भी निकले हैं। इन ऋषियों पर ब्रह्मांड में संतुलन बनाए रखने और मानव जाति को सही राह दिखाने की जिम्मेदारी है। माना जाता है कि सप्तर्षि आज भी अपने कार्य में लगे हुए हैं।

कैसे हुई सप्तर्षि की उत्पत्ति

।।सप्त ब्रह्मर्षि, देवर्षि, महर्षि, परमर्षय:।
कण्डर्षिश्च, श्रुतर्षिश्च, राजर्षिश्च क्रमावश:।।


वेदों में वर्णित इस श्लोक में सप्तर्षि के नामों का उल्लेख है जो इस प्रकार हैं- वशिष्ठ, विश्वामित्र, कश्यप, भारद्वाज, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, ऋषि। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सप्तर्षि की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के मस्तिष्क से हुई थी। इसलिए इन्हें ज्ञान, विज्ञान, धर्म-ज्योतिष और योग में सर्वोच्च माना जाता है।

कौन थे ये ऋषि? (Who were these sages?)

ऋषि वशिष्ठ (Rishi Vashishtha) - ऋषि वशिष्ठ राजा दशरथ के कुलगुरु थे। उन्हीं से राजा दशरथ के चारों पुत्रों- राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने शिक्षा प्राप्त की थी। उन्हीं की सलाह पर राजा दशरथ ने श्री राम और श्री लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ राक्षसों का वध करने के लिए आश्रम भेजा था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच युद्ध हुआ था। जिसमें ऋषि वशिष्ठ विजयी हुए थे।

ऋषि विश्वामित्र (Rishi Vishwamitra) - विश्वामित्र राजा होने के साथ-साथ ऋषि भी थे। ऋषि विश्वामित्र ने ही गायत्री मंत्र की रचना की थी। ऋषि विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है। उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को अपने शरीर के साथ स्वर्ग के दर्शन कराए थे।

ऋषि कश्यप (Rishi Kashyap)- ऋषि कश्यप ब्रह्मा के पुत्र मरीचि के विद्वान पुत्र थे। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कश्यप ऋषि के वंशजों ने ब्रह्मांड के विस्तार में मदद की थी। कश्यप ऋषि की 17 पत्नियां थीं। माना जाता है कि उनकी पत्नी अदिति से सभी देवताओं की उत्पत्ति हुई और उनकी पत्नी दिति से राक्षसों की उत्पत्ति हुई। ऐसा माना जाता है कि शेष पत्नियों से भी विभिन्न जीवों की उत्पत्ति हुई है।

ऋषि भारद्वाज  (Rishi Bhardwaj) - भारद्वाज ऋषि को सप्तऋषियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ऋषि भारद्वाज ने आयुर्वेद समेत कई ग्रंथों की रचना की थी। इनके पुत्र द्रोणाचार्य थे।

ऋषि अत्रि (Rishi Atri) - ऋषि अत्रि को सत्ययुग में ब्रह्मा के 10 पुत्रों में से एक माना जाता है। अनुसूया उनकी पत्नी थीं। हमारे देश में कृषि विकास में ऋषि अत्रि का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्हें प्राचीन भारत का एक महान वैज्ञानिक भी माना जाता है।

ऋषि जमदग्नि (Rishi Jamadagni) - भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे। इनके आश्रम में मनोवांछित फल देने वाली एक गाय थी, जिसे कार्तवीर्य छीनकर अपने साथ ले गए। जब परशुराम जी को इस बात का पता चला तो उन्होंने कार्तवीर्य का वध कर दिया और कामधेनु गाय को आश्रम में वापस ले आए।

ऋषि गौतम (Rishi Vashishtha) - गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या थीं। उनके श्राप के कारण अहिल्या पत्थर में बदल गई थीं। भगवान श्री राम की कृपा से अहिल्या को अपना स्वरूप पुनः प्राप्त हुआ। गौतम ऋषि ने अपनी तपस्या के बल पर मां गंगा को ब्रह्मगिरि पर्वत पर लाया।

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