Varaha Avatar: भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक भगवान वराह का अवतार है, जिन्हें विष्णु के अवतारों में तीसरा अवतार माना जाता है। पद्मपुराण में बताया गया है कि वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान वराह के अवतार की पूजा करनी चाहिए।
Varaha Avatar: भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक भगवान वराह का अवतार है, जिन्हें विष्णु के अवतारों में तीसरा अवतार माना जाता है। पद्मपुराण में बताया गया है कि वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान वराह के अवतार की पूजा करनी चाहिए। वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इस अवतार की पूजा की जाती है। इस एकादशी पर भगवान वराह के अवतार की कथा पढ़ना और सुनना भी शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु ने वराह अवतार क्यों लिया था? इस अवतार को लेने के पीछे क्या कहानी है? अगर नहीं जानते हैं, तो आइए इस खबर में विस्तार से जानते हैं।
द्वारपालों के श्राप की है कथा (Dwarpal Ko Shrap Kya Hai Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, बैकुंठ लोक के द्वारपाल जय और विजय ने बैकुंठ लोक जाते समय सप्त ऋषियों को द्वार पर रोक लिया था, जिसके कारण उन्हें श्राप मिला था कि उन दोनों को तीन जन्मों तक धरती पर राक्षस के रूप में रहना पड़ेगा। पहले जन्म में दोनों कश्यप और दिति के पुत्र के रूप में जन्मे और हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष कहलाए। दोनों ने पृथ्वी के लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया। पृथ्वी पर हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष के अत्याचार बढ़ते जा रहे थे। हिरण्याक्ष लोगों को यज्ञ और अन्य अनुष्ठान करने के लिए प्रताड़ित करने लगा।
इस तरह प्रकट हुए भगवान वराह (How Lord Varaha Appeared)
एक दिन घूमते-घूमते हिरण्याक्ष वरुण की नगरी में पहुंच गया। पाताल लोक में जाकर हिरण्याक्ष ने वरुण देव को युद्ध के लिए ललकारा। वरुण देव ने कहा कि 'अब मुझे युद्ध करने की इच्छा नहीं है, मैं अब आप जैसे बलवान योद्धा से लड़ने में सक्षम नहीं हूं, आप विष्णु जी से युद्ध करें।' तब देवताओं ने ब्रह्मा जी और विष्णु जी से हिरण्याक्ष से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी नाक से वराह नारायण को जन्म दिया। इस तरह हरि के वराह अवतार का जन्म हुआ।
वराह अवतार ने किया राक्षस का वध (Varaha Avatar Killed The Demon)