Hanuman Ji: हनुमान जी को कलियुग का जागृत देवता माना जाता है। रामायण कथा के अनुसार हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है, इसलिए हनुमान जी किसी न किसी रूप में अपने भक्तों के बीच मौजूद रहते हैं।
Hanuman Ji: हनुमान जी को कलियुग का जागृत देवता माना जाता है। रामायण कथा के अनुसार हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है, इसलिए हनुमान जी किसी न किसी रूप में अपने भक्तों के बीच मौजूद रहते हैं। पौराणिक मान्यता है कि जो भी हनुमान जी को याद करके उन्हें अपने कष्ट बताता है, उसके कष्ट जल्द ही दूर हो जाते हैं।
इसका मतलब यह है कि हनुमान जी के भक्त उनसे संवाद भी कर सकते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि त्रेता युग में हनुमान जी तक एक ऐसा गुप्त संवाद पहुंचा था, जिसे सुनकर हनुमान जी ने रावण की सोने की लंका में आग लगा दी थी। आइए, जानते हैं किसके कहने पर हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी।
लंका पहुंचकर हनुमान जी की विभीषण से मुलाकात
रामायण कथा के अनुसार जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो सबसे पहली ध्वनि उन्हें श्री राम के नाम की सुनाई देती है। हनुमान जी यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि लंका में कौन भगवान श्री राम का नाम ले रहा है। इसके बाद हनुमान जी विभीषण से मिलते हैं और उन्हें पता चलता है कि विभीषण राम भक्त हैं और रावण की नीतियों के खिलाफ हैं। इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका में दयनीय अवस्था में बैठी माता सीता से मिलते हैं। सीता जी के पास त्रिजटा नाम की दासी बैठी थी।
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हनुमान जी को लंका में श्री राम से गुप्त वार्तालाप मिला
हनुमान जी सूक्ष्म रूप में एक पेड़ पर बैठ गए और त्रिजटा के वहां से जाने का इंतजार करने लगे। तभी हनुमान जी ने सुना कि त्रिजटा माता सीता से कह रही है कि उसने ब्रह्म मुहूर्त में स्वप्न में देखा है कि सोने की लंका में आग लग गई है और सोने की लंका जलकर राख हो गई है।
इसका अर्थ है कि भगवान श्री राम जल्द ही लंका पर विजय प्राप्त कर रावण का वध करेंगे। त्रिजटा ने माता सीता को आश्वस्त किया कि ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया यह स्वप्न भविष्य का संकेत हो सकता है। त्रिजटा की बात सुनकर माता सीता को आशा दिखी कि जल्द ही उनके दुखों का अंत होने वाला है। पेड़ पर बैठे हनुमान जी भी ये बातें सुन रहे थे।
गुप्त वार्तालाप में हनुमान जी को लंका जलने का संकेत मिला
जब हनुमान जी ने त्रिजटा की बातें सुनीं तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि हनुमान जी ने भी ऐसा ही स्वप्न देखा था। हनुमान जी ने स्वप्न में वह सब कुछ देखा था, जो त्रिजटा ने सीता जी को बताया था। इस गुप्त वार्तालाप में हनुमान को लंका दहन का समाचार मिला। इस वार्तालाप से हनुमान जी समझ गए कि भगवान श्री राम लंका दहन का संकेत दे रहे हैं, ताकि रावण का अभिमान तोड़ा जा सके। साथ ही लंका दहन के साथ माता पार्वती का श्राप भी जुड़ा था, जिसका प्रमाण इस त्रेता युग में मिलना था।
बातचीत सुनकर हनुमान जी असमंजस में पड़ गए
हनुमान जी को यह तो स्पष्ट था कि भगवान श्री राम उनसे गुप्त संवाद करके उन्हें क्या संदेश दे रहे हैं, लेकिन हनुमान जी असमंजस में पड़ गए कि इस दूसरे देश में बिना किसी व्यवस्था यानी तेल, अग्नि आदि के वे लंका दहन कैसे करेंगे? हनुमान जी इसी सोच में डूबे हुए थे कि अचानक उन्होंने देखा कि माता सीता पेड़ के नीचे अकेली बैठी हैं। इसके बाद हनुमान जी ने माता सीता से मुलाकात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि उन्हें भगवान श्री राम ने भेजा है। हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्री राम की अंगूठी दी। अंगूठी देखकर माता सीता प्रसन्न हुईं।
हनुमान ने अशोक वाटिका में मचाया उत्पात
माता सीता से मिलने के बाद हनुमान अशोक वाटिका में घूमने लगे। हनुमान फल-फूल तोड़कर उनका आनंद लेने लगे। जब लंका के कुछ सैनिकों ने हनुमान जी को देखा तो उन्होंने बजरंगबली को पकड़ने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। जब यह खबर लंका के राजमहल में पहुंची तो रावण के पुत्र हनुमान जी को पकड़ने के लिए एक-एक करके अशोक वाटिका पहुंचे। खुद को हर तरह से विफल होता देख मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। ब्रह्मास्त्र का सम्मान करने के लिए हनुमान जी ने उसे प्रणाम किया और खुद पेड़ से टकराकर नीचे गिर गए। इसके बाद हनुमान जी को पकड़कर लंका के राज दरबार में पेश किया गया।
इस तरह हनुमान जी ने जलाई सोने की लंका
राज दरबार में पेश किए जाने पर हनुमान जी ने रावण से कहा कि वह एक दूत हैं और भगवान श्री राम का समाचार लेकर आए हैं। हनुमान जी के मुख से भगवान श्री राम का समाचार सुनकर रावण बहुत क्रोधित हुआ और उसने हनुमान जी को मृत्युदंड देने का निर्णय लिया। यह देखकर दरबार में बैठे विभीषण ने कहा कि दूत के साथ ऐसा व्यवहार करना मर्यादा के विरुद्ध है। यदि ऐसा किया गया तो कई राज्यों के राजा भी रावण को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखेंगे।
यह सुनकर अहंकारी रावण तैयार हो गया। इसके बाद रावण का अभिमान उसके सिर पर चढ़ गया और उसने हनुमान जी की पूंछ में कपड़ा बांधकर उसमें आग लगाने को कहा। इसके बाद जैसे ही कपड़ा हनुमान जी की पूंछ में डाला गया, हनुमान जी पूरे वेग से उड़ गए और पूरी लंका में आग लगा दी। हनुमान जी मन ही मन मुस्कुराए और बोले- "प्रभु, आपकी जो भी इच्छा है, आप उसे किसी न किसी तरह पूरी कर दीजिए।" यह भी पढ़ें- Ram Setu Ka Rahasya: 3 किलोमीटर चौड़े और 30 किलोमीट लंबे रामसेतु का क्या है रहस्य, जानें पौराणिक कथा
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