Nag Panchami: पौराणिक कथा के अनुसार, कालिया नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली नाग यमुना नदी में रहने लगा था। उसके विष का प्रभाव इतना अधिक था कि यमुना का जल जहरीला हो गया था।
Nag Panchami: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व नाग देवताओं की पूजा और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं के लिए विशेष माना जाता है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग हों या भगवान कृष्ण की कालिया नाग से जुड़ी कथा, सनातन परंपरा में नागों का संबंध धार्मिक आस्था के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण कथाओं से रहा है। इनमें भगवान कृष्ण और कालिया नाग की कथा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि वृंदावन के पास यमुना नदी में कालिया नाग के रहने से वहां का जल विषैला हो गया था। इससे आसपास रहने वाले लोगों और पशु-पक्षियों के लिए संकट पैदा हो गया था।
ऐसे समय में बाल स्वरूप भगवान कृष्ण ने कालिया नाग के अहंकार का दमन किया और उसके फनों पर नृत्य किया, लेकिन सवाल यह है कि भगवान कृष्ण ने कालिया नाग के फन पर ही नृत्य क्यों किया? आइए जानते हैं कालिया नाग और भगवान कृष्ण से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा...
यमुना में कालिया नाग के रहने से फैल गया था विष
पौराणिक कथा के अनुसार, कालिया नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली नाग यमुना नदी में रहने लगा था। उसके विष का प्रभाव इतना अधिक था कि यमुना का जल जहरीला हो गया था। उसके आसपास के पेड़-पौधे तक प्रभावित होने लगे थे। जो भी पशु-पक्षी उस क्षेत्र के आसपास जाते, उनके लिए भी खतरा पैदा हो जाता था। कालिया नाग के विष के कारण यमुना का वह हिस्सा लोगों के लिए भय का कारण बन गया था। गोकुल और वृंदावन के लोग इस समस्या से परेशान थे। कोई भी उस स्थान के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था। भगवान कृष्ण ने जब यह स्थिति देखी तो उन्होंने कालिया नाग के आतंक को समाप्त करने का निर्णय लिया।
कालिया नाग यमुना में क्यों आया था?
कथा के अनुसार कालिया नाग पहले रमणक द्वीप में रहता था। वहां गरुड़ का भय था। नागों और गरुड़ के बीच शत्रुता की कथा पुराणों में मिलती है। कालिया नाग ने गरुड़ से बचने के लिए यमुना के उस स्थान को अपना निवास बना लिया था, जहां गरुड़ के आने पर रोक मानी जाती थी। बताया जाता है कि यमुना के एक हिस्से में सौभरि ऋषि के कारण गरुड़ का प्रवेश वर्जित था। इसी वजह से कालिया नाग ने वहां अपना ठिकाना बना लिया। लेकिन कालिया के विष के कारण यमुना का वातावरण दूषित होने लगा और वहां रहने वाले जीव-जंतुओं के लिए संकट पैदा हो गया।
भगवान कृष्ण ने यमुना में लगाई छलांग
एक दिन भगवान कृष्ण अपने ग्वाल-बाल मित्रों के साथ यमुना के किनारे खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी गेंद यमुना के उसी हिस्से में चली गई, जहां कालिया नाग का वास था। भगवान कृष्ण गेंद लेने के लिए यमुना में कूद गए। भगवान कृष्ण के यमुना में प्रवेश करते ही कालिया नाग क्रोधित हो उठा। उसने कृष्ण को अपने विशाल शरीर से जकड़ लिया। यह देखकर वहां मौजूद ग्वाल-बाल घबरा गए और उन्होंने इसकी सूचना वृंदावन के लोगों को दी।
कृष्ण को कालिया के बंधन में देखकर नंद बाबा, यशोदा मैया और अन्य लोग यमुना के किनारे पहुंच गए। सभी भगवान कृष्ण की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। लेकिन भगवान कृष्ण ने जल्द ही अपना प्रभाव दिखाया और कालिया नाग के बंधन से स्वयं को मुक्त कर लिया।
कालिया नाग के फनों पर क्यों किया नृत्य?
इसके बाद भगवान कृष्ण कालिया नाग के फनों पर चढ़ गए। कालिया के कई फन थे और वह अपनी पूरी शक्ति से कृष्ण को हटाने का प्रयास करने लगा, लेकिन भगवान कृष्ण उसके फनों पर एक के बाद एक कदम रखते हुए नृत्य करने लगे। कथा में भगवान कृष्ण का कालिया नाग के फनों पर नृत्य करना केवल एक युद्ध का दृश्य नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह कालिया नाग के अहंकार और उसके विषैले प्रभाव के दमन का प्रतीक है। कालिया नाग जितना अधिक विरोध करता, भगवान कृष्ण उसके फनों पर उतना ही अधिक दबाव डालते। धीरे-धीरे उसकी शक्ति कमजोर पड़ने लगी। उसके फन झुक गए और उसका अहंकार भी समाप्त हो गया।
कालिया की पत्नियों ने भगवान कृष्ण से मांगी क्षमा
जब कालिया नाग की स्थिति कमजोर होने लगी तो उसकी पत्नियां, जिन्हें नाग-पत्नियां कहा जाता है, भगवान कृष्ण के सामने पहुंचीं। उन्होंने भगवान कृष्ण की स्तुति की और कालिया के अपराध के लिए क्षमा मांगी। नाग-पत्नियों ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की कि वे कालिया के प्राण न लें। उन्होंने कृष्ण की दिव्यता को स्वीकार करते हुए अपने पति के जीवन की रक्षा की याचना की। भगवान कृष्ण ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। उन्होंने कालिया नाग को आदेश दिया कि वह यमुना छोड़कर रमणक द्वीप चला जाए। भगवान कृष्ण ने यह भी कहा कि उनके चरणों के निशान कालिया के फनों पर अंकित हो गए हैं, इसलिए गरुड़ अब उसे नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को क्यों छोड़ दिया?
भगवान कृष्ण का उद्देश्य कालिया नाग की हत्या करना नहीं, बल्कि उसके विष और अहंकार का दमन करना था। कालिया के कारण यमुना का वातावरण दूषित हो रहा था और लोगों के जीवन पर संकट था, इसलिए भगवान कृष्ण ने पहले उसके अत्याचार को रोका और फिर उसे वहां से चले जाने का आदेश दिया। कालिया नाग ने भी भगवान कृष्ण की शक्ति को स्वीकार कर लिया। इसके बाद वह अपनी पत्नियों और परिवार के साथ यमुना छोड़कर चला गया। कालिया के चले जाने के बाद यमुना का वह क्षेत्र फिर से सुरक्षित हो गया।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)