Lord Ganesha Story: शिव पुराण की कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेशजी को जन्म दिया था। जन्म देने के बाद जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं तो उन्होंने भगवान गणेश से कहा कि मैं स्नान करने जा रही हूं।
Lord Ganesha Story: शिव पुराण की कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेशजी को जन्म दिया था। जन्म देने के बाद जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं तो उन्होंने भगवान गणेश से कहा कि मैं स्नान करने जा रही हूं। इसलिए इस दौरान कोई भी अंदर न आए। लेकिन थोड़ी देर बाद भगवान शंकर वहां आए और देवी पार्वती के भवन में जाने लगे। यह देखकर उस बालक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। बालक की हठ देखकर भगवान शंकर क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से उस बच्चे का सिर धड़ से अलग कर दिया।
जब देवी पार्वती ने यह देखा तो वे बहुत क्रोधित हुईं। उनके क्रोध की अग्नि से ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने शिवजी से उस बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। तब भगवान शंकर के अनुरोध पर विष्णुजी एक हाथी का सिर लेकर आए और उन्होंने उस सिर को उस बालक के धड़ पर रखकर उसे जीवित कर दिया।
लेकिन गणेश जी के असली सिर का क्या हुआ, इसकी जानकारी बहुत कम स्थानों पर उपलब्ध होने के कारण लोगों को इसके बारे में बहुत कम जानकारी है। दरअसल, भगवान श्री गणेश के कटे हुए सिर को लेकर विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में अलग-अलग मान्यताएं हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलती है। तो आइए जानते हैं आखिर कहां गया गणेश जी का कटा हुआ सिर...
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कहां गया भगवान गणेश का कटा हुआ सिर?
एक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव ने गणपति का सिर काटा तो किसी को नहीं पता था कि सिर कहां गिरा। जब शिव दूतों को खोजने के बाद सिर नहीं मिला तो शिव ने भगवान गणेश को एक हाथी का सिर दे दिया। बाद में पता चला कि भगवान शंकर ने इतने गुस्से में गणेश का सिर काटा था कि उनका सिर धरती पर एक गुफा में जा गिरा।
इस गुफा आज भी मौजूद है गणेश जी का कटा हुआ सिर
इस गुफा में आज भी गणेश जी का कटा हुआ सिर मौजूद है। यह गुफा उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है और इस गुफा का नाम पाताल भुवनेश्वर है। आज भी इस गुफा में गणेश जी के कटे हुए सिर की पूजा की जाती है। यह गुफा पहाड़ के करीब 90 फीट अंदर बनी हुई है। इस गुफा की खोज राजा ऋतुपर्ण ने की थी, जो सूर्य वंश के राजा थे और त्रेता युग में अयोध्या पर शासन करते थे।
राजा हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में पहुंचे, तब उन्होंने इस गुफा की खोज की। ऐसा माना जाता है कि इस गुफा में पाए गए चार पत्थर चार युगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और चौथा पत्थर कलियुग का प्रतीक है। यह चौथा पत्थर दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहता है। एक पौराणिक मान्यता है कि जिस दिन चौथा पत्थर गुफा की दीवार को छू लेगा, कलियुग समाप्त हो जाएगा।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेशजी का सिर काट दिया, तो वह सिर गंगा में प्रवाहित हो गया था। ऐसा माना जाता है कि गंगा में बहने के कारण गणेशजी का मूल सिर हमेशा के लिए खो गया था। बाद में शिव ने हाथी के सिर को उनके धड़ से जोड़कर गणेशजी को पुनर्जीवित किया।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, गणेशजी के कटे हुए सिर को देवताओं ने स्वर्ग ले जाकर सुरक्षित रख लिया था। यह सिर आज भी दिव्य लोकों में स्थित है और गुप्त रूप से इसकी पूजा की जाती है। वहीं कुछ तंत्र ग्रंथों के अनुसार गणेश जी का सिर एक दिव्य शक्ति में परिवर्तित होकर शिवलिंग में विलीन हो गया था। इसलिए गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना जाता है, क्योंकि उनका मूल सिर भगवान शिव की शक्ति में विलीन हो गया है। यह भी पढ़ें- Bhasma For Shiv Puja: महादेव अपने शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म, जानिए इसके पीछे की कहानी
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