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Diwali: दिवाली क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान राम के अयोध्या लौटने की पौराणिक कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Diwali Story: दिवाली का त्योहार हमें भगवान राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व बताता है कि सत्य, प्रेम, त्याग और धर्म की हमेशा जीत होती है। 
 

Diwali
Diwali Kyon Manai Jati Hai: भारत में दिवाली यानी दीपावली का त्योहार बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। दिवाली को रोशनी, खुशियों और उल्लास का पर्व कहा जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों, रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाते हैं। घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी का घर में आगमन होता है और उनकी कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली मनाने के पीछे सबसे प्रचलित पौराणिक कथा क्या है? आइए जानते हैं भगवान राम के अयोध्या लौटने की पूरी कहानी और दिवाली मनाने का धार्मिक महत्व।

दिवाली मनाने के पीछे सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में अयोध्या नगरी में राजा दशरथ का शासन था। उनके चार पुत्र थे, जिनमें भगवान राम सबसे बड़े थे। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। वह अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाले और धर्म के मार्ग पर चलने वाले आदर्श पुत्र थे। एक दिन राजा दशरथ की पत्नी कैकेयी ने उनसे अपने दो पुराने वचन पूरे करने की मांग की। उन्होंने पहले वचन में अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन मांगा और दूसरे वचन में भगवान राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांगा। 


राजा दशरथ अपने वचन से बंधे हुए थे। इसलिए उन्हें भारी मन से भगवान राम को वनवास भेजना पड़ा। भगवान राम ने पिता की आज्ञा का सम्मान करते हुए बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय लिया। उनके साथ पत्नी माता सीता और छोटे भाई लक्ष्मण भी वनवास के लिए चले गए। भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया।

रावण ने किया माता सीता का हरण

वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में रहने लगे। इसी दौरान लंकापति रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया और उन्हें लंका ले गया। माता सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए भगवान राम ने वानर सेना की सहायता ली। इस युद्ध में हनुमान जी, सुग्रीव और अन्य वानर योद्धाओं ने भगवान राम का साथ दिया। भगवान राम ने लंका पहुंचकर रावण को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में भगवान राम ने रावण का वध कर दिया और अधर्म पर धर्म की विजय हुई। इसके बाद भगवान राम ने माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराया।

वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे भगवान राम

रावण का वध करने के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपना वनवास पूरा किया और अयोध्या लौटने की तैयारी की। जब अयोध्या के लोगों को यह समाचार मिला कि उनके प्रिय राजा राम वापस आ रहे हैं, तो पूरी नगरी में खुशी की लहर दौड़ गई। मान्यता है कि भगवान राम के अयोध्या लौटने का दिन कार्तिक महीने की अमावस्या का था। उनके स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को साफ किया और घरों के बाहर दीपक जलाए। चारों ओर रोशनी की गई और लोगों ने फूलों से रास्तों को सजाया। हर तरफ उत्सव जैसा माहौल था।

अयोध्या के लोगों ने भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का भव्य स्वागत किया। इसी खुशी में पूरी नगरी दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। तभी से भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में हर साल कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाने की परंपरा जुड़ी हुई मानी जाती है।

दिवाली पर क्यों की जाती है पूजा?

दिवाली के दिन भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी मनाने के साथ-साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी हैं। वहीं भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और पूजा स्थल को सुंदर तरीके से सजाते हैं। शाम के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

दिवाली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

दिवाली केवल दीपक जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता और अच्छाई को अपनाने का संदेश भी देता है। भगवान राम की कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, हमें सत्य और धर्म का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। दीपक जलाने का अर्थ है अपने जीवन से अज्ञान, निराशा और नकारात्मकता को दूर करके ज्ञान और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाना।

हमें क्या सीख देती है दिवाली?

दिवाली का त्योहार हमें भगवान राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व बताता है कि सत्य, प्रेम, त्याग और धर्म की हमेशा जीत होती है। हमें अपने परिवार और समाज के साथ मिलकर खुशियां बांटनी चाहिए और जरूरतमंद लोगों की सहायता करनी चाहिए। इस तरह दिवाली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में जलाए गए दीप आज भी लोगों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों का उजाला फैलाते हैं। यही वजह है कि हर साल दिवाली का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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