Sawan Third Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने की विशेष परंपरा है। सावन के तीसरे सोमवार का व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास करते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजन करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि सोमवार का व्रत रखने के बाद पारण भी कुछ नियमों के अनुसार करना चाहिए? क्या आप जानते हैं कि व्रत खोलने का सही समय और तरीका क्या माना जाता है? आइए जानते हैं सावन के तीसरे सोमवार के व्रत का पारण कैसे करें, किन बातों का ध्यान रखें और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
कब करें व्रत का पारण
सावन सोमवार के व्रत में पारण का समय व्रत रखने की परंपरा और संकल्प पर निर्भर करता है। सामान्य रूप से सोमवार का व्रत भगवान शिव की पूजा करने के बाद खोला जाता है। भक्त सोमवार के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा पूरी करने के बाद उचित समय पर भगवान शिव को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। कई भक्त शाम की पूजा और आरती के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में दिन में पूजा के बाद भी पारण किया जाता है। इसलिए जिस व्रत विधि और संकल्प के अनुसार आपने उपवास रखा है, उसी के अनुसार पारण करना उचित माना जाता है।
पारण से पहले करें शिव पूजा
व्रत खोलने से पहले भगवान शिव की पूजा करना विशेष माना जाता है। इसके लिए स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान शिव को जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर सकते हैं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव की आरती का पाठ किया जा सकता है। पूजा के बाद भगवान शिव को फल, मिठाई या घर में बने सात्विक भोजन का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
कैसे खोलें सोमवार का व्रत
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को प्रणाम करें और मन में व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें। इसके बाद थोड़ा पानी या प्रसाद ग्रहण करके पारण शुरू किया जा सकता है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद अचानक बहुत ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए। सबसे पहले फल, दूध, दही, नारियल पानी या हल्का सात्विक भोजन लेना बेहतर माना जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सामान्य भोजन किया जा सकता है। अगर आपने निर्जला व्रत रखा है तो पारण के समय पहले पानी या किसी हल्के पेय से शुरुआत करना विशेष रूप से जरूरी माना जाता है।
पारण में क्या खा सकते हैं
सोमवार व्रत खोलते समय सात्विक और हल्का भोजन करना चाहिए। फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें व्रत की परंपरा के अनुसार ग्रहण की जा सकती हैं। अगर आपने पूरे दिन केवल फलाहार किया है, तो पारण में भी हल्का भोजन लेना बेहतर रहता है। भोजन में प्याज-लहसुन और तामसिक चीजों से बचने की परंपरा कई परिवारों में होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
व्रत के पारण में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। भगवान शिव की पूजा और भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है। पारण के दौरान जरूरत से ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन करने से बचना चाहिए। व्रत के दौरान जिन चीजों का सेवन नहीं किया गया है, उन्हें अचानक अधिक मात्रा में खाना भी उचित नहीं माना जाता। खासकर निर्जला या लंबे समय तक उपवास रखने वालों को धीरे-धीरे भोजन शुरू करना चाहिए।
सोमवार व्रत के पारण का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ उपवास करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। व्रत का पारण भी पूजा और संकल्प की पूर्णता का हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि जिस तरह व्रत रखते समय भगवान शिव का ध्यान और पूजा की जाती है, उसी तरह व्रत खोलते समय भी श्रद्धा और सात्विकता बनाए रखनी चाहिए। भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण करना व्रत की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
व्रत के बाद क्या करें
पारण के बाद भगवान शिव का स्मरण करें और पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। अगर संभव हो तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, फल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान भी किया जा सकता है। सावन सोमवार का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसमें पूजा, संयम और श्रद्धा का भी महत्व बताया गया है, इसलिए पारण करते समय भी मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करना शुभ माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)