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Sawan Third Somvar: सावन के तीसरे सोमवार पर करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगे कष्ट

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sawan Third Somvar: सावन के तीसरे सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान या शिव मंदिर में भगवान शिव की पूजा करें। 

Lord Shiva
Sawan Third Somvar: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार को शिव भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल, फल तथा जल अर्पित करते हैं। पूजा के साथ सावन सोमवार की व्रत कथा का पाठ करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना गया है। सावन के तीसरे सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के बाद इस प्रचलित व्रत कथा का पाठ किया जा सकता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से कथा का श्रवण या पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्त के जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

 

सावन सोमवार की व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में भगवान शिव का एक परम भक्त रहता था। वह बहुत श्रद्धालु और धर्मपरायण था। प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करता और उनकी आराधना में अपना समय लगाता था। उसकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि उसके जीवन में भगवान शिव की कृपा बनी रहे और उसके सभी कष्ट दूर हों।

वह व्यक्ति नियमित रूप से शिव मंदिर जाता था। मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाता, बेलपत्र अर्पित करता और भगवान शिव का ध्यान करता था। सावन का महीना आने पर उसकी भक्ति और भी बढ़ गई। उसने सावन के सभी सोमवार का व्रत रखने का संकल्प लिया। वह प्रत्येक सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके भगवान शिव की पूजा करता और पूरे दिन व्रत रखता। शाम के समय शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करता और शिव मंत्रों का जाप करता था।

कुछ समय बाद उसके जीवन में अनेक परेशानियां आने लगीं। घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और उसके सामने कई तरह की कठिनाइयां खड़ी हो गईं। इसके बावजूद उसने भगवान शिव की पूजा और सोमवार का व्रत नहीं छोड़ा। उसका विश्वास था कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्त की सच्ची भक्ति अवश्य स्वीकार करेंगे।

एक दिन वह शिव मंदिर में बैठकर भगवान शिव की पूजा कर रहा था। पूजा समाप्त होने के बाद उसने भगवान शिव के सामने अपनी परेशानियां रखीं और प्रार्थना की कि हे महादेव, मेरे जीवन के सभी कष्ट दूर कीजिए और मुझे अपनी भक्ति से कभी दूर मत होने दीजिए। उसकी प्रार्थना सुनकर भगवान शिव प्रसन्न हुए। भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और कहा कि जो भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, सावन के सोमवार का व्रत रखता है और सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उस पर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है।

भगवान शिव ने उसे सावन सोमवार के व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि सावन का सोमवार उनके लिए अत्यंत प्रिय है। इस दिन जो भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, बेलपत्र चढ़ाता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उसकी मनोकामना भगवान शिव पूरी करते हैं। भगवान शिव की कृपा से उसके जीवन के कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। घर में सुख-शांति लौट आई और उसकी परेशानियां समाप्त होने लगीं। इसके बाद वह पहले से भी अधिक श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करने लगा।

 

सावन सोमवार व्रत की दूसरी प्रचलित कथा

सावन सोमवार से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। उसके पास धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी। इसी कारण वह हमेशा चिंतित रहता था। साहूकार और उसकी पत्नी भगवान शिव की पूजा करते थे। प्रत्येक सोमवार को दोनों भगवान शिव का व्रत रखते और शिव मंदिर जाकर पूजा करते थे। सावन के महीने में उन्होंने विशेष रूप से सोमवार का व्रत और भगवान शिव की आराधना शुरू की।

साहूकार की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उसके कष्ट के बारे में पूछा। माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि उनका भक्त लंबे समय से संतान प्राप्ति की इच्छा रखता है। तब भगवान शिव ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उसका पुत्र अल्पायु होगा। कुछ समय बाद साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन साहूकार को भगवान शिव द्वारा कही गई बात याद थी। जब बालक बड़ा हुआ तो उसके पिता ने उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए उसके मामा के साथ काशी भेज दिया।

रास्ते में बालक जहां भी रुकता, वहां भगवान शिव की पूजा करता था। काशी पहुंचकर भी उसने शिव आराधना जारी रखी। एक दिन उसका विवाह एक कन्या से हुआ। विवाह के कुछ समय बाद ही उसकी आयु पूरी होने का समय आ गया। कथा के अनुसार, बालक की मृत्यु होने वाली थी। यह देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उस बालक के प्राण बचाने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने माता पार्वती की प्रार्थना स्वीकार कर ली और उस बालक को जीवनदान दे दिया।

जब बालक जीवित हुआ तो उसके परिवार में खुशी छा गई। साहूकार और उसकी पत्नी ने भगवान शिव का धन्यवाद किया और पहले से भी अधिक श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करने लगे। इसी कथा के आधार पर सावन सोमवार के व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सावन सोमवार को श्रद्धा के साथ व्रत करता है, भगवान शिव की पूजा करता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उस पर महादेव की कृपा बनी रहती है।

 

Symbols Of Lord Shiva

सावन के तीसरे सोमवार पर ऐसे करें कथा का पाठ

सावन के तीसरे सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान या शिव मंदिर में भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग पर जल और अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल, अक्षत और फल अर्पित करके भगवान शिव का ध्यान करें।

पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और सावन सोमवार की व्रत कथा का पाठ करें। कथा समाप्त होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। अंत में भगवान शिव से अपनी मनोकामना और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा के साथ उनकी व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी पुण्यदायक माना जाता है। इसलिए सावन के तीसरे सोमवार पर व्रत रखने वाले भक्त पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक इस कथा का पाठ कर सकते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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