Sawan Forth Somvar: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भोलेनाथ की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Sawan Forth Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त सोमवार के दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र समेत कई पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इस साल भी सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं और अब तीसरे सोमवार के बाद भक्तों को आखिरी यानी चौथे सावन सोमवार का इंतजार है। क्या आपको पता है कि 2026 में सावन का आखिरी सोमवार किस तारीख को पड़ रहा है? इस दिन भगवान शिव की पूजा किस तरह करनी चाहिए और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है? आइए जानते हैं....
सावन के आखिरी सोमवार की तिथि?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ था और इस दौरान चार सोमवार पड़े हैं। पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा सोमवार 24 अगस्त को है। इस तरह 24 अगस्त को भक्त सावन के आखिरी सोमवार का व्रत रखेंगे। इसके बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ उत्तर भारत में सावन महीने का समापन होगा।
क्यों खास है सावन सोमवार?
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भोलेनाथ की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं सोमवार का दिन भी भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। यही वजह है कि सावन में आने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। भक्त सावन सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। कई लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति और परिवार की सुख-शांति के लिए भी सावन सोमवार का व्रत करते हैं।
सुबह स्नान से करें शुरुआत
सावन के आखिरी सोमवार के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। अगर घर में शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा है तो वहीं पूजा की जा सकती है। इसके अलावा भक्त नजदीकी शिव मंदिर जाकर भी जलाभिषेक कर सकते हैं।
ऐसे करें शिवलिंग का अभिषेक
पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद या पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा भी है। हालांकि, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार केवल जल अर्पित करके भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और धतूरा आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ भगवान शिव को चंदन और अक्षत अर्पित करके धूप-दीप जलाएं।
बेलपत्र चढ़ाने का महत्व
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय है। बेलपत्र चढ़ाते समय भक्त भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना कर सकते हैं। इसके बाद शिव चालीसा, शिव मंत्र या भगवान शिव की आरती की जा सकती है।
करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप
सावन सोमवार की पूजा में भगवान शिव के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शिव आराधना में विशेष माना जाता है। मंत्र जाप के बाद भगवान शिव की आरती करें और उन्हें फल या सात्विक भोग अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।
सावन सोमवार के व्रत में क्या खाएं?
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। व्रत में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों का सेवन किया जाता है। हालांकि, व्रत रखने के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं, इसलिए जिस तरह से आपके घर में लंबे समय से व्रत रखा जाता है, उसी परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।
व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में सावन सोमवार को भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। भक्त इस दिन व्रत, जलाभिषेक और मंत्र जाप के माध्यम से भोलेनाथ की भक्ति करते हैं। माना जाता है कि सावन में शिव पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। सावन के आखिरी सोमवार का महत्व इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि इसके साथ इस साल के सावन सोमवार के व्रतों की श्रृंखला पूरी हो जाएगी। 24 अगस्त को शिव आराधना के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ उत्तर भारत में सावन महीने का समापन होगा।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)