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Sawan Durga Ashtami: सावन दुर्गा अष्टमी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sawan Durga Ashtami: सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं इस महीने की अष्टमी तिथि पर मां भगवती की पूजा का भी विधान बताया गया है।

Sawan Durga Ashtami Vrat Katha: 
Sawan Durga Ashtami Vrat Katha: सावन मास की दुर्गा अष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा, व्रत और व्रत कथा का पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि पर विधि-विधान से देवी की आराधना करने और उनकी कथा सुनने से मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है। सावन के महीने में आने वाली दुर्गा अष्टमी पर यदि श्रद्धापूर्वक व्रत रखा जाए और पूजा के बाद व्रत कथा का पाठ किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि और देवी की कृपा बनी रहती है। आखिर सावन दुर्गा अष्टमी पर कौन सी व्रत कथा पढ़नी चाहिए और इस कथा में मां दुर्गा की कृपा का वर्णन किस प्रकार किया गया है।

सावन दुर्गा अष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा का महत्व

सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं इस महीने की अष्टमी तिथि पर मां भगवती की पूजा का भी विधान बताया गया है। सनातन परंपरा में देवी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। अष्टमी तिथि देवी उपासना के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और घर के पूजा स्थान में मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उनकी पूजा करते हैं।

पूजा में मां भगवती को लाल पुष्प, रोली, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा की आरती की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि व्रत कथा के बिना देवी व्रत की पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए अष्टमी के दिन कथा का श्रवण या पाठ विशेष रूप से किया जाता है।

 

Sawan Durga Ashtami Vrat Katha: 

मां दुर्गा की व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। ब्राह्मण भगवान और देवी का परम भक्त था। वह प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पूजा करता और अपनी सामर्थ्य के अनुसार देवी को भोग लगाता था। निर्धनता के कारण उसके घर में अनेक प्रकार की परेशानियां थीं, लेकिन ब्राह्मण ने कभी देवी की भक्ति नहीं छोड़ी।

एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने अपने पति से कहा कि घर में अन्न का अभाव है और बच्चों के लिए भी भोजन की व्यवस्था करना कठिन हो गया है। ब्राह्मण ने पत्नी को धैर्य रखने के लिए कहा और मां दुर्गा की पूजा करने का संकल्प लिया। उसने अष्टमी तिथि का व्रत रखने और पूरे विधि-विधान से मां भगवती की आराधना करने का निश्चय किया।

अष्टमी के दिन ब्राह्मण ने प्रातःकाल स्नान किया। इसके बाद घर को स्वच्छ करके पूजा का स्थान तैयार किया। उसने मां दुर्गा का ध्यान किया और श्रद्धापूर्वक उनका पूजन किया। घर में उपलब्ध थोड़े से फल और अन्न से देवी को भोग लगाया गया। पूजा के बाद ब्राह्मण ने मां दुर्गा की व्रत कथा का पाठ किया और देवी से परिवार की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की। ब्राह्मण की पत्नी ने भी पूरे मन से देवी की पूजा की। दोनों ने दिनभर व्रत रखा और संध्या के समय मां दुर्गा की आरती की। उन्होंने देवी से अपने परिवार की रक्षा और घर में अन्न-धन की कमी दूर करने की प्रार्थना की।

कहा जाता है कि ब्राह्मण दंपती की भक्ति से मां दुर्गा प्रसन्न हुईं। रात्रि में ब्राह्मण को स्वप्न में देवी के दर्शन हुए। मां भगवती ने उसे दर्शन देकर कहा कि जो भक्त श्रद्धा और नियम से उनकी पूजा करता है, उसके घर में देवी की कृपा बनी रहती है। देवी ने ब्राह्मण को आशीर्वाद दिया और कहा कि अष्टमी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और कथा का पाठ करने से उसकी मनोकामना पूर्ण होगी।

अगले दिन जब ब्राह्मण की आंख खुली तो उसके घर का वातावरण बदला हुआ था। उसे अपने पुराने परिचित से सहायता प्राप्त हुई। उसके जीवन में धीरे-धीरे आर्थिक परेशानियां दूर होने लगीं। घर में अन्न की कमी समाप्त हुई और परिवार सुखपूर्वक रहने लगा। ब्राह्मण ने इसे मां दुर्गा की कृपा माना और नियमित रूप से अष्टमी के दिन देवी की पूजा तथा व्रत कथा का पाठ करने लगा।

समय बीतने के साथ ब्राह्मण के घर में सुख-समृद्धि बढ़ती गई। उसने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मां दुर्गा की आराधना जारी रखी। वह प्रत्येक अष्टमी को देवी की पूजा करता और श्रद्धापूर्वक व्रत कथा सुनता था। उसके घर में मां भगवती की कृपा बनी रही। कथा के अनुसार, जो स्त्री या पुरुष अष्टमी तिथि पर विधिपूर्वक व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा करता है और श्रद्धा से व्रत कथा का श्रवण करता है, उसके घर में देवी का आशीर्वाद बना रहता है। मां भगवती भक्तों के कष्ट दूर करती हैं और परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि प्रदान करती हैं। 

अष्टमी के दिन कथा के बाद मां दुर्गा की आरती की जाती है। इसके बाद देवी को भोग अर्पित करके प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है। जो लोग व्रत रखते हैं, वे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार करते हैं और देवी का स्मरण करते हैं।

 

Sawan Durga Ashtami Vrat Katha: 

सावन दुर्गा अष्टमी पर इस प्रकार करें पूजा

सावन दुर्गा अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। मां को लाल पुष्प, अक्षत, रोली और धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उनकी पूजा करें।

पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्र का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद मां दुर्गा की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। कथा पूरी होने के बाद मां की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं। अंत में देवी से परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी के दिन मां दुर्गा का पूजन करने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत कथा सुनने से देवी प्रसन्न होती हैं। सावन मास की इस अष्टमी पर जो भक्त नियम और श्रद्धा के साथ मां भगवती की आराधना करता है, उसके घर में मां दुर्गा की कृपा और सुख-समृद्धि बनी रहती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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