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Sawan Durga Ashtami: सावन दुर्गा अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, जानिए इस दिन क्या करें और क्या न करें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sawan Durga Ashtami: सावन दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई कर माता दुर्गा की पूजा की तैयारी करनी चाहिए।

Sawan Durga Ashtami 2026
Sawan Durga Ashtami 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए खास माना जाता है, लेकिन इसी महीने में आने वाली दुर्गा अष्टमी भी देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और घर में विधि-विधान से माता की पूजा करते हैं। वहीं, धार्मिक मान्यताओं में अष्टमी के दिन कुछ कामों को करने से बचने की सलाह भी दी गई है। क्या आपको पता है कि सावन दुर्गा अष्टमी पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन कामों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए? आइए जानते हैं इस दिन क्या करें और क्या न करें।

सुबह जल्दी उठकर करें स्नान

सावन दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई कर माता दुर्गा की पूजा की तैयारी करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा से पहले शरीर और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर संभव हो तो सुबह के समय ही माता का ध्यान करके पूजा का संकल्प लेना अच्छा माना जाता है। व्रत रखने वाले भक्त दिनभर सात्विक आहार और संयम का पालन करते हैं।

माता दुर्गा की विधि से करें पूजा

अष्टमी तिथि पर माता दुर्गा की पूजा में दीपक, धूप, फूल, अक्षत और फल आदि अर्पित किए जा सकते हैं। माता को लाल फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही देवी के मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती या देवी से जुड़े पाठ का पाठ किया जा सकता है। पूजा करते समय मन को शांत रखना चाहिए और श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करना चाहिए। घर में पूजा कर रहे हैं तो पूजा स्थान को साफ रखने के साथ वहां दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
 

इन चीजों से करें परहेज

सावन दुर्गा अष्टमी के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तामसिक भोजन से बचना चाहिए। मांसाहार, शराब और नशीली चीजों का सेवन इस दिन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोगों को भी अपने व्रत के नियमों के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। इसके अलावा प्याज-लहसुन को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं। जिस परिवार में व्रत या पूजा के दौरान इनका सेवन नहीं किया जाता, वहां इस नियम का पालन किया जाता है।

किसी का अपमान न करें

देवी उपासना के दिन केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार पर भी ध्यान देने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किसी व्यक्ति के साथ अपशब्द बोलने, झगड़ा करने या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। खासकर पूजा और व्रत के दौरान मन को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए। घर में भी बेवजह विवाद या क्रोध से बचना बेहतर माना जाता है।

बिना नियम जाने न रखें व्रत

अष्टमी पर कई लोग माता के लिए व्रत रखते हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए व्रत के नियम एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं। इसलिए अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। अगर किसी कारण से व्रत संभव नहीं है तो केवल पूजा और माता का स्मरण भी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। धार्मिक आस्था में पूजा के लिए श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है।

कन्या पूजन की भी है परंपरा

अष्टमी और नवमी के अवसर पर कई जगह कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण धोए जाते हैं और भोजन कराया जाता है। इसके बाद उन्हें सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दिया जाता है। हालांकि, कन्या पूजन की विधि और संख्या अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

पूजा में इन गलतियों से बचें

सावन दुर्गा अष्टमी पर पूजा करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पूजा की सामग्री को पहले से व्यवस्थित कर लेना बेहतर रहता है। दीपक जलाते समय भी सावधानी रखनी चाहिए और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना चाहिए। माता की पूजा के दौरान किसी भी तरह की अशुद्ध या खराब सामग्री अर्पित करने से बचना चाहिए। फूल और प्रसाद साफ होने चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान मोबाइल या दूसरी चीजों में व्यस्त रहने के बजाय ध्यान माता की आराधना में रखना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें

इस दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें, पूजा स्थान की सफाई करें और माता दुर्गा की श्रद्धा से पूजा करें। लाल फूल, फल, प्रसाद और दीपक आदि अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।

वहीं, मांसाहार, शराब और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए। किसी से झगड़ा, अपशब्द, अपमान और क्रोध करने से बचना चाहिए। व्रत भी अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार ही रखना चाहिए। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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