Putrada Ekadashi 2026: सबसे पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें। इसके बाद चंदन और पीले फूल अर्पित करें। भगवान को फल और अन्य सात्विक भोग लगाएं। विष्णु पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें।
Putrada Ekadashi 2026: सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, संतान की कुशलता और परिवार की सुख-शांति की कामना से किया जाता है। साल 2026 में पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 23 अगस्त को देर रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह करीब 4:18 बजे तक रहेगी।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा किस तरह करनी चाहिए? पूजा में किन चीजों को शामिल करना शुभ माना जाता है और व्रत के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि, नियम और धार्मिक महत्व।
सुबह स्नान से करें दिन की शुरुआत
पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के लिए पीले रंग के वस्त्र, पीले फूल, फल, तुलसी दल, धूप, दीप, चंदन और पंचामृत जैसी सामग्री रख सकते हैं। पूजा शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें और मन में व्रत का संकल्प लें। यदि संभव हो तो इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें।
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
सबसे पहले भगवान विष्णु को जल अर्पित करें। इसके बाद चंदन और पीले फूल अर्पित करें। भगवान को फल और अन्य सात्विक भोग लगाएं। विष्णु पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम, गीता या भगवान विष्णु से संबंधित स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
पंचामृत से कर सकते हैं अभिषेक
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करने की भी परंपरा है। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार करके भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर भगवान को वस्त्र और चंदन अर्पित किया जाता है। ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री स्वच्छ होनी चाहिए। भगवान विष्णु को भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है।
व्रत में क्या खाएं?
एकादशी व्रत में अनाज और दालों का सेवन नहीं किया जाता। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रख सकते हैं। फल, दूध, मखाने, साबूदाना और व्रत में खाई जाने वाली अन्य सात्विक चीजों का सेवन किया जा सकता है। जो लोग स्वास्थ्य कारणों से निर्जल या कठिन व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति और संयम के साथ दिन बिताना माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
पुत्रदा एकादशी के दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने की परंपरा है। इस दिन मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध, विवाद और गलत आचरण से भी दूर रहना चाहिए। एकादशी के दिन भगवान विष्णु का नाम स्मरण करना, भजन करना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु रात में जागरण करके भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन भी करते हैं।
पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी को संतान सुख की कामना से जुड़े महत्वपूर्ण व्रतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए भी इस व्रत को महत्वपूर्ण माना गया है। इस एकादशी को कई स्थानों पर पवित्रा एकादशी या पवित्रोपना एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर पर वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
द्वादशी को करें व्रत का पारण
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में किया जाता है। 2026 में पुत्रदा एकादशी का पारण 24 अगस्त को किया जाएगा। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग अर्पित करें। इसके बाद व्रत खोलकर सात्विक भोजन ग्रहण करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)