Sawan Durga Ashtami Vrat: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ देवी-देवताओं की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। इसी पवित्र महीने में आने वाली मासिक दुर्गाष्टमी का भी अपना धार्मिक महत्व है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। साल 2026 में सावन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 20 अगस्त को पड़ रही है। ऐसे में भक्तों के मन में सवाल है कि सावन दुर्गा अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा, अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी और पूजा के लिए कौन सा समय शुभ रहेगा? क्या आपको पता है कि इस बार सावन दुर्गाष्टमी पर अष्टमी तिथि 19 अगस्त की शाम से शुरू होगी? आइए जानते हैं सावन दुर्गा अष्टमी की पूरी जानकारी...
कब है सावन दुर्गा अष्टमी?
पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 19 अगस्त 2026, बुधवार को शाम 7 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 20 अगस्त 2026, गुरुवार को रात 9 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार सावन मास की मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 20 अगस्त, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने का विधान है। इसे मासिक दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है और प्रत्येक महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है।
सावन दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त
20 अगस्त को अष्टमी तिथि रात 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। हालांकि, मां दुर्गा की पूजा के लिए भक्त अपनी सुविधा के अनुसार सुबह स्नान आदि करने के बाद पूजा कर सकते हैं। शाम के समय भी देवी की आरती और दीप प्रज्वलित करके पूजा की जाती है।
कैसे रखें दुर्गाष्टमी का व्रत?
दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके वहां मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा में मां को लाल फूल, अक्षत, रोली, सिंदूर, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। मां दुर्गा को लाल रंग विशेष प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा भी है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर मां दुर्गा की आरती करें।
मां दुर्गा को क्या चढ़ाएं?
दुर्गाष्टमी की पूजा में मां दुर्गा को लाल फूल, लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत और फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां को मिठाई या घर में बनाए गए सात्विक भोग का प्रसाद भी चढ़ाया जा सकता है। पूजा के दौरान मां दुर्गा के मंत्रों का जाप और दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मां दुर्गा सप्तशती या देवी के अन्य स्तोत्रों का पाठ भी कर सकते हैं।
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
दुर्गाष्टमी के दिन पूजा से पहले पूजा स्थान और घर की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। मां दुर्गा को भोग लगाते समय सात्विक सामग्री का ही इस्तेमाल करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। कुछ भक्त पूरे दिन निर्जल या निराहार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फल और सात्विक आहार लेकर व्रत करते हैं। व्रत की परंपरा अलग-अलग परिवारों में अलग हो सकती है।
क्या है सावन दुर्गाष्टमी का महत्व?
हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि मां दुर्गा को समर्पित मानी जाती है। मासिक दुर्गाष्टमी पर देवी की आराधना करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। भक्त इस दिन मां से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। सावन मास में पड़ने के कारण इस दुर्गाष्टमी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान भगवान शिव के साथ माता पार्वती और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना करने की भी परंपरा है।
कब करें व्रत का पारण?
जो श्रद्धालु सावन दुर्गाष्टमी का व्रत रखते हैं, वे अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण कर सकते हैं। अष्टमी तिथि 20 अगस्त की रात 9 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत-पारण की परंपरा अलग-अलग स्थानों और परिवारों में अलग हो सकती है, इसलिए अपने घर की मान्यता के अनुसार पारण करना उचित माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)