Shravana Putrada Ekadashi: पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल एकादशी तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम से शुरू होकर 29 जुलाई को समाप्त होगी। एकादशी व्रत में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 29 जुलाई को रखा जाएगा।
Shravana Putrada Ekadashi: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ भगवान विष्णु की भक्ति के लिए भी विशेष माना जाता है। सावन महीने में आने वाली पुत्रदा एकादशी का धार्मिक दृष्टि से खास महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और एकादशी व्रत करने से संतान संबंधी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन क्या आपको पता है कि साल 2026 में सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा? पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है? आइए जानते हैं।
कब है सावन पुत्रदा एकादशी
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जुलाई को शाम के समय शुरू हुई थी और इसका समापन 29 जुलाई को होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 29 जुलाई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं।
एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल एकादशी तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम से शुरू होकर 29 जुलाई को समाप्त होगी। एकादशी व्रत में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 29 जुलाई को रखा जाएगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
कैसे करें पुत्रदा एकादशी की पूजा
पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को जल, पंचामृत, पीले फूल, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान को फल और सात्विक भोग लगाएं।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व होता है। इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित की जाती है।
संतान प्राप्ति के लिए खास मान्यता
पुत्रदा एकादशी को संतान प्राप्ति की कामना से रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति की इच्छा होती है, वे श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से संतान संबंधी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इसके अलावा संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना से भी इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हालांकि, इस व्रत का महत्व केवल संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता में इसे परिवार के सुख, समृद्धि और कल्याण से भी जोड़कर देखा गया है।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
एकादशी के दिन सात्विक भोजन और संयम का पालन करने की परंपरा है। जो लोग निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। व्रत के दौरान अन्न का सेवन न करने की धार्मिक परंपरा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय तुलसी दल का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। साथ ही मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया जाता है।
कब करें व्रत का पारण
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है, इसलिए सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को 30 जुलाई 2026 को द्वादशी तिथि में पारण करना चाहिए। पारण के समय से जुड़ी सही अवधि के लिए अपने स्थानीय पंचांग में सूर्योदय और द्वादशी तिथि के अनुसार समय देखना उचित रहेगा। धार्मिक परंपरा में माना जाता है कि एकादशी व्रत का पारण निर्धारित समय में विधि के अनुसार करना चाहिए। पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)