Bhaum Pradosh Vrat: पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी। उसका पति पहले ही इस संसार से विदा हो चुका था। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन वह भगवान शिव की परम भक्त थी।
Bhaum Pradosh Vrat: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महीने पड़ने वाला प्रदोष व्रत भी शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। क्या आपको पता है कि भौम प्रदोष के दिन कथा सुनने और पढ़ने को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी कथा और इसके धार्मिक महत्व के बारे में...
सावन में भौम प्रदोष का महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। वहीं, जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, जबकि भगवान शिव की आराधना से मंगल संबंधी दोषों से मुक्ति की मान्यता जुड़ी हुई है। सावन में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करते हैं और दिनभर व्रत रखते हैं। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जाता है।
भौम प्रदोष की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी। उसका पति पहले ही इस संसार से विदा हो चुका था। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन वह भगवान शिव की परम भक्त थी। वह नियमित रूप से शिव पूजा करती और प्रदोष व्रत का पालन करती थी। ब्राह्मणी का पुत्र भी अपनी मां के साथ भगवान शिव की आराधना करता था। दोनों मां-बेटे का जीवन भगवान शिव की भक्ति में बीत रहा था।
एक दिन वह बालक अपनी मां के साथ घर लौट रहा था। रास्ते में उसे एक घायल व्यक्ति दिखाई दिया। ब्राह्मणी ने उस व्यक्ति की सहायता की और उसे अपने घर ले आई। कुछ समय बाद पता चला कि वह व्यक्ति एक राजकुमार था, जो शत्रुओं के कारण अपने राज्य से दूर हो गया था। ब्राह्मणी और उसके पुत्र ने उसकी सेवा की। राजकुमार कुछ समय तक उनके साथ रहा।
शिव भक्ति से बदली परिस्थिति
ब्राह्मणी लगातार भगवान शिव की पूजा करती रही और प्रदोष व्रत रखती रही। उसने अपनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिव भक्ति नहीं छोड़ी। उसकी श्रद्धा और पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसकी सहायता करने का मार्ग बनाया। राजकुमार को भी धीरे-धीरे अपनी खोई हुई स्थिति वापस मिलने लगी। आगे चलकर उसके जीवन में सुख-समृद्धि आई और ब्राह्मणी के परिवार की परेशानियां भी दूर होने लगीं। धार्मिक मान्यता में इस कथा को भगवान शिव की कृपा और प्रदोष व्रत के प्रभाव से जोड़ा जाता है।
कथा पाठ क्यों माना जाता है शुभ
प्रदोष व्रत में पूजा के साथ कथा श्रवण का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का धार्मिक फल प्राप्त होता है और भक्त का मन भगवान शिव की भक्ति में एकाग्र होता है। भौम प्रदोष के दिन कथा पाठ करते समय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कथा का पाठ कर सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव की आरती और मंत्र जाप किया जाता है।
इस तरह करें पूजा
भौम प्रदोष के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें। घर के मंदिर में शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। शाम के समय प्रदोष काल में दोबारा भगवान शिव की पूजा करना विशेष माना जाता है। इस दौरान शिव-पार्वती का ध्यान करके प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें।
भौम प्रदोष में करें शिव मंत्र का जाप
पूजा और कथा पाठ के साथ भगवान शिव के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में शिव मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव की आराधना पूर्ण होती है। भौम प्रदोष व्रत में कथा पाठ का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करना भी माना जाता है, इसलिए इस दिन पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए शिव आराधना और कथा श्रवण करना शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)