facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  sawan ke akhiri mangala gauri vrat par kare is katha ka paath ghar me ayegi khushhaali

Mangala Gauri Vrat: सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत पर करें इस कथा का पाठ, घर में आएगी खुशहाली

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Mangala Gauri Vrat: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है। सावन के मंगलवार को महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं और विधि-विधान से माता गौरी की पूजा करती हैं। 

Mangala Gauri Vrat: 
Mangala Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन में आने वाले मंगलवार को सुहागिन महिलाएं और विवाह योग्य कन्याएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं। इस व्रत में माता गौरी की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पूजा के साथ मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत की कथा और इसके पाठ से जुड़ी मान्यता...

मंगला गौरी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है। सावन के मंगलवार को महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं और विधि-विधान से माता गौरी की पूजा करती हैं। माता को सुहाग की सामग्री, फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि मंगला गौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता गौरी की आराधना करती हैं।

 

Mangala Gauri Vrat: 

मंगला गौरी व्रत की कथा

प्रचलित कथा के अनुसार, एक नगर में धर्मपाल नाम का एक धनवान व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की इच्छा से वह और उसकी पत्नी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने लगे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। हालांकि, माता ने यह भी बताया कि उनके पुत्र की आयु कम होगी। कुछ समय बाद उनके घर पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम शिव बताया गया। माता-पिता अपने पुत्र को पाकर बहुत प्रसन्न हुए, लेकिन उसके अल्पायु होने की चिंता उन्हें हमेशा सताती रही।

पुत्र का विवाह

समय बीतने के साथ शिव बड़ा हुआ। एक दिन उसके विवाह की बात चली। उसका विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ, जिसकी माता मंगला गौरी की परम भक्त थीं। वह नियमित रूप से माता गौरी की पूजा और व्रत करती थीं। कथा के अनुसार, उस कन्या की माता की भक्ति से माता गौरी प्रसन्न थीं। विवाह के बाद जब शिव अपनी पत्नी के घर पहुंचा तो उसकी पत्नी की मां ने विधि-विधान से माता गौरी की पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

माता गौरी की कृपा

कहा जाता है कि शिव की अल्पायु के कारण विवाह के बाद उसकी पत्नी के जीवन पर संकट आने की आशंका थी, लेकिन माता गौरी की कृपा और मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से उसके जीवन में आया संकट टल गया। माता गौरी ने उसकी पत्नी को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। इसके बाद शिव की आयु से जुड़ा संकट दूर हो गया और उसका वैवाहिक जीवन सुखमय हो गया। इसी वजह से मंगला गौरी व्रत को सुहाग और दांपत्य सुख से जोड़कर देखा जाता है।

 

Mangala Gauri Vrat: 

आखिरी व्रत पर करें कथा का पाठ

सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाएं माता गौरी की पूजा करने के बाद इस कथा का श्रवण या पाठ कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा सुनने से व्रत का महत्व बढ़ता है और माता गौरी की कृपा प्राप्त होती है। पूजा के दौरान माता गौरी को लाल या पीले फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री चढ़ाने की परंपरा भी है। पूजा के बाद व्रत कथा पढ़कर माता गौरी से परिवार की सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना की जाती है।

किन बातों का रखें ध्यान

मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थल की सफाई करके माता गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके पूजा की जाती है। कथा का पाठ शांत मन से करना शुभ माना जाता है। पूजा पूरी होने के बाद माता को भोग लगाकर आरती की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान और सुहाग सामग्री का वितरण भी कर सकती हैं। मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती को सौभाग्य और वैवाहिक सुख की देवी के रूप में पूजा जाता है, इसलिए सावन के आखिरी मंगलवार को विधि-विधान से पूजा करने के साथ मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel