हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रम्भा तृतीया का व्रत रखा जाता है. इस साल रंभा तीज व्रत 20 मई दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
Rambha Tritiya 2025 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रम्भा तृतीया का व्रत रखा जाता है. इस दिन कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं. विवाहित महिलाएं भी अपने पति की लंबी आयु और बुद्धिमान संतान की प्राप्ति और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए इस व्रत को विधिपूर्वक करती हैं. रम्भा तीज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. रम्भा तृतीया या रम्भा तीज के दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार अप्सरा रम्भा ने सौभाग्य प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा था. इसलिए इसे रम्भा तीज कहा जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं इस बार सौंदर्य और सौभाग्य का व्रत रम्भा तीज कब है और शुभ फल पाने के लिए किस तरह से पूजा करनी चाहिए....
रंभा तृतीया व्रत कब है?
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 28 जून बुधवार की 01:54 बजे से शुरू हो रहा है। वहीं यह तिथि 29 जून 2025 की रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगी। उदया तिथि 29 मई 2025 गुरुवार को पड़ रही है, इसलिए यह व्रत 29 मई 2025 को रखा जाएगा।
रम्भा तृतीया, जिसे रम्भा तीज के नाम से भी जाना जाता है, देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है। यह त्यौहार दिव्य स्त्री शक्ति का जश्न मनाता है और इसे विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है जो अपने पतियों की भलाई और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। यह त्यौहार देवी पार्वती की प्राचीन कथा पर आधारित है, जिन्होंने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। रम्भा तृतीया उनकी भक्ति और दृढ़ता का उत्सव है। त्यौहार का नाम रम्भा से लिया गया है, जो एक अप्सरा (आकाशीय अप्सरा) थी जो अपनी सुंदरता और आकर्षण के लिए जानी जाती थी, जो अनुग्रह और स्त्रीत्व का प्रतीक है।
रम्भा तीज व्रत का महत्व
ऐसा माना जाता है कि रम्भा तीज का व्रत रखने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। उनके पति की आयु बढ़ती है। उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। रम्भा तीज का व्रत रखने और दान करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है तथा महिला हमेशा स्वस्थ रहती है। ऐसा माना जाता है कि महिलाएं सुंदर यौवन प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखती हैं।
रंभा तीज व्रत के दौरान महिलाओं को शुभ मुहूर्त में पूजा करनी चाहिए। पूजा करने से पहले महिलाओं को अक्षत, चंदन, गुलाल, मेहंदी, हल्दी, फूल, घी और सोलह श्रृंगार का सामान इकट्ठा कर लेना चाहिए।
रंभा तीज व्रत पूजा विधि
रम्भा तीज के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य की ओर मुख करके बैठें और दीपक जलाएं। आपको बता दें कि इस दिन विवाहित महिलाएं सौभाग्य और सौंदर्य की प्रतीक रम्भा, धन की देवी मां लक्ष्मी और सती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस दिन कुछ जगहों पर रम्भा के प्रतीक के रूप में चूड़ियों के जोड़े की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन रम्भोतकीलन यंत्र की भी पूजा की जाती है। इस दिन अप्सरा रम्भा को चंदन, पुष्प आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा अगर आप रम्भा तीज के दिन हाथ में अक्षत लेकर इन मंत्रों का जाप करते हैं तो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहेगी।