facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  kamika ekadashi sawan ki ekadashi ka naam kaise pada kamika ekadashi janiye pauranik katha

Kamika Ekadashi: सावन की एकादशी का नाम कैसे पड़ा कामिका एकादशी? जानें पौराणिक कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी की कथा एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी हुई है, जिसने क्रोधवश एक गंभीर पाप कर दिया था। कथा के अनुसार एक गांव में एक क्षत्रिय रहता था। किसी कारण उसका एक ब्राह्मण से विवाद हो गया।

Kamika Ekadashi
Kamika Ekadashi: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए जितना विशेष माना जाता है, उतना ही यह भगवान विष्णु की उपासना के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसी पावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। सनातन परंपरा में इस एकादशी का उल्लेख विशेष रूप से पुराणों में मिलता है। कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर इस एकादशी का नाम "कामिका" क्यों पड़ा और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर के संवाद के दौरान कामिका एकादशी का महत्व और इसकी कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस कथा में बताया गया है कि इस तिथि का नाम केवल एक पर्व के रूप में नहीं रखा गया, बल्कि इसके पीछे एक गहरा धार्मिक आधार और पौराणिक प्रसंग जुड़ा हुआ है।

क्यों कहलाती है कामिका एकादशी?

संस्कृत में "कामिका" शब्द का संबंध "काम" या "कामना" से माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि यह ऐसी एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक उपासना करने से भक्त की धार्मिक और शुभ कामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण इस एकादशी को "कामिका" नाम दिया गया। पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा है कि सावन कृष्ण पक्ष की यह एकादशी समस्त एकादशियों में अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और जागरण का विशेष महत्व बताया गया है।

 

Kamika Ekadashi

पद्म पुराण में वर्णित पौराणिक कथा

कामिका एकादशी की कथा एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी हुई है, जिसने क्रोधवश एक गंभीर पाप कर दिया था। कथा के अनुसार एक गांव में एक क्षत्रिय रहता था। किसी कारण उसका एक ब्राह्मण से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि क्रोध में आकर उस क्षत्रिय ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। ब्राह्मण की हत्या को धर्मशास्त्रों में महापाप माना गया है। इस घटना के बाद वह क्षत्रिय अपने किए गए कर्म से व्याकुल रहने लगा।

उसने अनेक विद्वान ब्राह्मणों और ऋषियों के पास जाकर अपने पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। जब उसने ब्राह्मणों से प्रायश्चित का मार्ग जानना चाहा, तब उन्होंने कहा कि ब्रह्महत्या जैसा महापाप अत्यंत गंभीर है। पहले उसे अपने अपराध का पश्चाताप करना होगा और फिर उचित धार्मिक उपाय अपनाने होंगे। किंतु उसके पाप के कारण किसी ने भी उसे यज्ञ अथवा धार्मिक अनुष्ठान में सम्मिलित नहीं किया।

वन में जाकर ऋषियों से मांगा मार्गदर्शन

समाज से तिरस्कृत होने के बाद वह व्यक्ति वन में चला गया। वहां उसने अनेक तपस्वी ऋषियों और मुनियों की सेवा की। लंबे समय तक विनम्र भाव से उनकी सेवा करने के बाद उसने अपने अपराध को स्वीकार करते हुए उनसे मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषियों ने उसकी पश्चाताप की भावना को देखकर उसे सावन कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत रखने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि श्रद्धा, नियम और पूर्ण निष्ठा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए यह व्रत किया जाए। ऋषियों ने उसे यह भी बताया कि व्रत केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए। इसके साथ भगवान विष्णु की पूजा, रात्रि जागरण और द्वादशी के दिन विधिपूर्वक व्रत का पारण करने की भी सलाह दी गई।

 

Kamika Ekadashi

भगवान विष्णु की आराधना से मिला आशीर्वाद

ऋषियों के निर्देशानुसार उस क्षत्रिय ने पूरी श्रद्धा के साथ कामिका एकादशी का व्रत किया। उसने भगवान विष्णु का पूजन किया, पूरी रात उनका स्मरण किया और द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक व्रत का पारण किया। पौराणिक कथा के अनुसार उसकी सच्ची भक्ति, पश्चाताप और व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उनकी कृपा से वह ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हुआ और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त हुई। इसी प्रसंग के माध्यम से पुराणों में कामिका एकादशी के व्रत का महत्व बताया गया है।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया इसका महत्व

पद्म पुराण में वर्णित संवाद के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है और इसका पालन कैसे करना चाहिए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि यह एकादशी अत्यंत पवित्र मानी गई है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। तुलसी दल अर्पित कर भगवान की आराधना करने का भी विशेष उल्लेख मिलता है। इस तिथि पर रात्रि जागरण और विष्णु नाम का स्मरण भी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग बताया गया है।

 

Kamika Ekadashi

तुलसी और भगवान विष्णु का विशेष संबंध

कामिका एकादशी के प्रसंग में तुलसी का उल्लेख भी विशेष रूप से मिलता है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन तुलसी दल अर्पित कर पूजा करने की परंपरा का वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालिग्राम पर तुलसी दल अर्पित करना, दीप प्रज्वलित करना तथा विष्णु सहस्रनाम या भगवान के नामों का स्मरण करना इस व्रत का महत्वपूर्ण भाग माना गया है।

कामिका एकादशी का नाम और कथा का संबंध

कामिका एकादशी की कथा का मूल भाव यही है कि भगवान विष्णु की शरण में जाकर श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत को विशेष स्थान प्राप्त है। "कामिका" नाम भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ा माना गया है कि यह एकादशी भक्त की शुभ और धार्मिक कामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनती है।

इसी कारण पुराणों में इसे सावन मास की अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी के रूप में वर्णित किया गया है। पद्म पुराण में वर्णित श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर के संवाद तथा ब्रह्महत्या से जुड़े क्षत्रिय की कथा इस एकादशी की पहचान का प्रमुख आधार मानी जाती है। इसके माध्यम से ही यह तिथि सनातन धर्म की प्रमुख एकादशियों में अपना विशेष स्थान रखती है।





यह भी पढ़ें:-

Kamika Ekadashi Vrat Katha: कामिका एकादशी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान विष्णु की बनी रहेगी विशेष कृपा 

Kamika Ekadashi: कब मनाई जाएगी कामिका एकादशी, जानें तिथि, पूजन विधि, धार्मिक महत्व और व्रत की संपूर्ण जानकारी 

Kamika Ekadashi 2026 : कामिका एकादशी पर क्या करें क्या न करें जानिए, महत्व 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel