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Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या पर जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, घर में बनी रहेगी खुशहाली

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Pithori Amavasya 2026: पौराणिक कथा के अनुसार एक समय इंद्राणी ने माता पार्वती से ऐसे व्रत के बारे में पूछा, जिसे करने से संतान की प्राप्ति हो और संतान पर आने वाले संकट दूर हों। 

Pithori Amavasya 2026
Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या हिंदू धर्म में संतान की सुख-समृद्धि, उनकी दीर्घायु और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन माताएं श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर देवी पिठोरी के साथ 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा करती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार पिठोरी अमावस्या की पूजा में व्रत कथा का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। पिठोरी व्रत की कथा में एक ब्राह्मण परिवार की बहू विदेहा और उसके आठ मृत पुत्रों का प्रसंग आता है, जिन्हें 64 योगिनियों की कृपा से पुनः जीवन प्राप्त होता है। इसी कथा के कारण इस व्रत में 64 योगिनियों की पूजा का विशेष विधान माना गया है।

इस वर्ष पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने के बाद पिठोरी अमावस्या व्रत कथा का श्रवण या पाठ करने से व्रत की पूजा पूर्ण मानी जाती है।

पिठोरी अमावस्या व्रत कथा की शुरुआत

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय इंद्राणी ने माता पार्वती से ऐसे व्रत के बारे में पूछा, जिसे करने से संतान की प्राप्ति हो और संतान पर आने वाले संकट दूर हों। इंद्राणी ने माता पार्वती से उस व्रत की कथा और विधि बताने का आग्रह किया, तब माता पार्वती ने पिठोरी व्रत की कथा सुनाते हुए कहा कि प्राचीन समय में श्रीधर नाम के एक बहुत धनी ब्राह्मण रहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुमित्रा, पुत्र शंकर और उनकी पुत्रवधू विदेहा रहती थी। परिवार में सभी लोग सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन विदेहा के जीवन में एक के बाद एक ऐसा दुख आया, जिसने पूरे परिवार को शोक में डाल दिया।

विदेहा के आठ पुत्रों की मृत्यु

विदेहा के यहां जब भी पुत्र का जन्म होता, कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो जाती। एक-एक करके उसके आठ पुत्र जन्म के बाद मृत्यु को प्राप्त हो गए। हर बार पुत्र को खोने का दुख विदेहा के लिए असहनीय होता गया। संतान की मृत्यु से वह अत्यंत दुखी रहने लगी। आठवें पुत्र की मृत्यु के बाद विदेहा का दुख और भी बढ़ गया। अपने मृत पुत्र को लेकर वह शोक में डूब गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। वह अपने पुत्रों को याद करके विलाप करती रहती थी। एक दिन वह अपने मृत पुत्र को लेकर घर से निकल पड़ी। दुख और शोक में भटकते हुए वह एक ऐसे स्थान पर पहुंची, जहां 64 योगिनियां विराजमान थीं। विदेहा ने वहां पहुंचकर योगिनियों को प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई।

विदेहा ने 64 योगिनियों से मांगी प्रार्थना

विदेहा ने 64 योगिनियों के सामने अपनी पूरी पीड़ा रखी। उसने कहा कि उसके सात पुत्र पहले ही जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं और अब आठवें पुत्र की भी मृत्यु हो गई है। वह संतान को बार-बार खोने के दुख से टूट चुकी है। विदेहा ने योगिनियों से प्रार्थना करते हुए कहा कि वह उनके शरण में आई है। यदि उनकी कृपा हो जाए तो उसके मृत पुत्रों को जीवन मिल सकता है और भविष्य में उसकी संतान सुरक्षित रह सकती है। विदेहा की करुण पुकार सुनकर 64 योगिनियों को उस पर दया आ गई। उन्होंने उसकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया।

योगिनियों की कृपा से जीवित हुए आठों पुत्र

कथा के अनुसार 64 योगिनियों ने विदेहा को वरदान दिया कि उसके आठों पुत्र फिर से जीवित हो जाएंगे। योगिनियों ने उसे वहां रखा हुआ नैवेद्य प्रदान किया और कहा कि वह प्रसन्न होकर अपने घर लौट जाए। जैसे ही योगिनियों ने उसे आशीर्वाद दिया, उसी समय विदेहा के सभी आठ मृत पुत्र जीवित हो गए और उसके पास आकर खड़े हो गए। अपने पुत्रों को जीवित देखकर विदेहा की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

वह 64 योगिनियों का स्मरण करती हुई अपने आठों पुत्रों के साथ अपने घर लौट आई। जब श्रीधर, सुमित्रा, शंकर और परिवार के अन्य सदस्यों ने विदेहा को आठों पुत्रों के साथ वापस आते देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस घर में लंबे समय से संतान की मृत्यु के कारण शोक था, वहां फिर से आनंद और उत्सव का वातावरण बन गया।

विदेहा ने किया 64 योगिनियों का पूजन

अपने पुत्रों के जीवित होने के बाद विदेहा ने 64 योगिनियों की कृपा को कभी नहीं भुलाया। उसने पिठोरी अमावस्या के दिन विधिपूर्वक 64 योगिनियों का पूजन किया। इस पूजा में ब्राह्मणों द्वारा मंत्रों का पाठ किया गया और परिवार में मंगल उत्सव मनाया गया। कथा के अनुसार विदेहा ने श्रद्धापूर्वक 64 योगिनियों का पूजन किया। पूजा के अवसर पर विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए और देवी को नैवेद्य अर्पित किया गया। इसके साथ ही मंगल गीत, वाद्य और अन्य धार्मिक आयोजन किए गए। यही कारण है कि पिठोरी अमावस्या पर 64 योगिनियों की पूजा की परंपरा मानी जाती है। इस दिन आटे से देवी पिठोरी, 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की आकृतियां बनाने की भी परंपरा बताई गई है।

माता पार्वती ने बताया पिठोरी व्रत का फल

कथा के अंत में माता पार्वती ने इंद्राणी को बताया कि जो स्त्रियां श्रद्धा और भक्ति के साथ पिठोरी व्रत करती हैं तथा 64 योगिनियों का पूजन करती हैं, उन्हें देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पिठोरी व्रत को विशेष रूप से संतान की रक्षा, संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा गया है। पिठोरी अमावस्या की पूजा में व्रत कथा का पाठ करने के बाद देवी पिठोरी और 64 योगिनियों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया जाता है। धार्मिक परंपरा में इस दिन कथा सुनना और सुनाना व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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