Narak Chaturdashi: दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा करने के साथ घर में दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन घर के मुख्य द्वार से लेकर आंगन और पूजा स्थल तक दीपक जलाए जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नरक चतुर्दशी पर आखिर कितने दीपक जलाने चाहिए और दीपदान के लिए कौन-सी दिशा शुभ मानी जाती है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं।
नरक चतुर्दशी पर कितने दीपक जलाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। इन्हें यम दीपक भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन 14 दीपक जलाकर घर के अलग-अलग स्थानों पर रखने से नकारात्मकता दूर होती है और परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में इस दिन पांच या उससे अधिक दीपक जलाने की भी परंपरा है। दीपकों की संख्या से अधिक इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से दीपदान करने को महत्व दिया जाता है।
14 दीपक जलाने का क्या है महत्व?
नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने के पीछे यमराज से जुड़ी धार्मिक मान्यता है। इस दिन यमराज की पूजा करके उनसे परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। मान्यता है कि 14 दीपक जलाकर यमराज को अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। कुछ परंपराओं में इन दीपकों को घर के अलग-अलग हिस्सों में रखा जाता है, ताकि पूरे घर में प्रकाश बना रहे। इसे जीवन से अंधकार, भय और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है।
कहां और किस दिशा में रखें दीपक?
नरक चतुर्दशी के दिन यम दीपक जलाने की परंपरा शाम के समय निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज के नाम का दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इस दिन दीपक जलाते समय उसमें सरसों का तेल डालना और रूई की बाती लगाना शुभ माना जाता है। दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर या दक्षिण दिशा में किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि दीपक ऐसी जगह रखें, जहां हवा से वह तुरंत बुझे नहीं और किसी को चोट लगने का खतरा भी न हो।
नरक चतुर्दशी पर दीपदान का शुभ समय
नरक चतुर्दशी पर दीपदान का विशेष महत्व प्रदोष काल में माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के बाहर और आसपास दीपक जलाए जाते हैं। वहीं यम दीपक जलाने की परंपरा में संध्याकाल का विशेष महत्व बताया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में दीपदान की विधि और समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त के अनुसार दीपक जलाना उचित माना जाता है।
दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
नरक चतुर्दशी पर दीपक जलाते समय साफ मिट्टी के दीपकों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। दीपक में सरसों का तेल या घी अपनी परंपरा के अनुसार डाल सकते हैं। यम दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की सुख-शांति, लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से यमराज की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)