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Narak Chaturdashi: छोटी दिवाली पर यमराज को दीपदान करने की क्या है वजह? जानें इसका महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Narak Chaturdashi: हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता और धर्म का पालन करने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है। 

छोटी दिवाली
Narak Chaturdashi: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने के साथ यमराज के नाम से भी दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर यमराज को दीप अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस दिन यमराज के नाम पर दीपक क्यों जलाया जाता है? इसके पीछे कौन-सी पौराणिक मान्यता जुड़ी है और दीपदान करने का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

छोटी दिवाली पर यमराज को दीपदान क्यों?

हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु का देवता और धर्म का पालन करने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है। इस परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक यमराज के लिए दीपक जलाता है, उसके परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। इससे घर के सदस्यों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यही वजह है कि छोटी दिवाली पर घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है।

यम दीपदान से जुड़ी पौराणिक कथा

यम दीपदान के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है। कथा के अनुसार, एक समय हेम नाम के राजा के पुत्र का जन्म हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। यह जानकर राजा और रानी बहुत चिंतित रहने लगे। समय आने पर राजकुमार का विवाह हुआ और भविष्यवाणी के अनुसार उसकी मृत्यु का समय नजदीक आ गया। राजकुमार की पत्नी ने अपने पति को मृत्यु से बचाने के लिए विवाह के चौथे दिन महल के मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और दीपकों का ढेर लगा दिया। उसने पूरे महल को रोशनी से भर दिया और रातभर जागकर धार्मिक गीत गाती रही। जब यमराज सर्प का रूप धारण करके राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे, तो दीपकों की तेज रोशनी और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वह राजकुमार के प्राण नहीं ले सके और वापस लौट गए। मान्यता है कि तभी से इस दिन यमराज के नाम पर दीपदान करने की परंपरा शुरू हुई।

किस दिशा में जलाया जाता है यम दीपक?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी की शाम यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाना शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है। इस दिन घर के मुख्य द्वार के बाहर दीपक रखा जाता है। परंपरा के अनुसार, दीपक में सरसों का तेल और रुई की बाती का इस्तेमाल किया जाता है। दीपक जलाते समय परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और लंबी आयु की कामना की जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में यम दीपदान की विधि और परंपराओं में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है।

यम दीपदान का क्या है धार्मिक महत्व?

नरक चतुर्दशी पर यमराज को दीपदान करने का धार्मिक महत्व केवल अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना तक सीमित नहीं है। यह परंपरा जीवन की रक्षा, परिवार के कल्याण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना से भी जुड़ी है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। दीपक की रोशनी को अंधकार और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है। यही कारण है कि छोटी दिवाली पर घर की साफ-सफाई और रोशनी के साथ यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।

 
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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