विज्ञापन
Home  dharm  vrat  krishnapingala sankashti chaturthi vrat ka kaise kare parana janiye vidhi niyam dharmik mahatva

Krishnapingala Sankashti Chaturthi: कृष्णापिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत का कैसे करें पारण? जानें विधि और नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Krishnapingala Sankashti Chaturthi: संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान गणेश की उपासना करते हैं। 

Krishnapingala Sankashti
Krishnapingala Sankashti Chaturthi: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को कृष्णापिंगल संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और पूरे दिन व्रत रखकर चंद्रमा के दर्शन एवं अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है, जब पूजा के साथ-साथ पारण भी विधिपूर्वक किया जाए। ऐसे में आइए जानते हैं कि कृष्णापिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण कैसे किया जाता है और इसके दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।

कृष्णापिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण कब करें?

संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान गणेश की उपासना करते हैं। इस व्रत का पारण रात में चंद्रमा के उदय के बाद किया जाता है। सबसे पहले चंद्रदेव के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद चंद्रमा को जल, अक्षत, पुष्प और रोली अर्पित कर अर्घ्य दिया जाता है। चंद्रमा की पूजा के बाद भगवान गणेश की पुनः आरती कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। इसके पश्चात ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

व्रत पारण की संपूर्ण विधि

व्रत पारण करते समय सबसे पहले भगवान गणेश को नैवेद्य अर्पित करें। उन्हें मोदक, लड्डू, गुड़, दूर्वा और मौसमी फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ण होने तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। आरती के बाद भगवान को अर्पित किए गए प्रसाद को सबसे पहले ग्रहण करें। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही सामान्य भोजन करके व्रत का पारण करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पारण सात्विक भोजन से करना चाहिए। भोजन में फल, दूध, खीर, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े से बने व्यंजन अथवा घर का सात्विक भोजन लिया जा सकता है। कई श्रद्धालु पारण के बाद बिना लहसुन-प्याज का भोजन ग्रहण करते हैं।

पारण के समय किन बातों का रखें ध्यान?

  • व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना नहीं करना चाहिए। संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना गया है।
  • पारण से पहले भगवान गणेश को भोग अवश्य लगाएं। बिना भोग लगाए सीधे भोजन करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
  • पारण के समय तामसिक भोजन, मदिरा और मांसाहार से दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन को ही प्राथमिकता दी जाती है।
  • यदि परिवार के अन्य सदस्य भी व्रत कर रहे हों, तो सामूहिक रूप से भगवान गणेश की आरती के बाद पारण करना शुभ माना जाता है।

पारण में किन चीजों का सेवन करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को प्रिय प्रसाद से व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है। इनमें प्रमुख रूप से मोदक, बेसन या बूंदी के लड्डू, गुड़, केले, नारियल, पंचामृत, खीर, मौसमी फल शामिल हैं। इनमें से किसी भी प्रसाद को भगवान गणेश को अर्पित करने के बाद स्वयं ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है।

यदि निर्जला व्रत रखा हो तो कैसे करें पारण?

जो श्रद्धालु निर्जला संकष्टी चतुर्थी व्रत रखते हैं, उन्हें पारण की शुरुआत जल या पंचामृत से करनी चाहिए। इसके बाद भगवान का प्रसाद ग्रहण करें और फिर हल्का सात्विक भोजन करें। एकदम भारी या अधिक तला-भुना भोजन करने से बचना उचित माना जाता है। धीरे-धीरे सामान्य भोजन ग्रहण करना बेहतर माना जाता है।

क्या पारण अगले दिन किया जा सकता है?

सामान्यतः संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण उसी रात चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। यही पारंपरिक और प्रचलित विधि मानी जाती है। हालांकि, यदि किसी विशेष परिस्थिति, स्वास्थ्य संबंधी कारण या स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग व्यवस्था हो, तो अपने कुलाचार या योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार पारण किया जा सकता है।

पारण से पहले गणेश पूजा का क्रम

पारण से पहले भगवान गणेश की संक्षिप्त पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, अक्षत, चंदन और मोदक अर्पित करें। फिर गणेश मंत्र या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान से व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रसाद ग्रहण करें और व्रत का पारण करें।

कृष्णापिंगल संकष्टी चतुर्थी पारण के प्रमुख नियम

  • चंद्रमा के उदय के बाद ही व्रत का पारण करें।
  • पहले चंद्रदेव को अर्घ्य दें, फिर भगवान गणेश की आरती करें।
  • भगवान को भोग अर्पित करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करें।
  • प्रसाद लेने के बाद सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें।
  • पारण के समय स्वच्छता और पूजा के नियमों का पालन करें।
  • तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
  • यदि चंद्रमा दिखाई न दे, तो पंचांग के चंद्रोदय समय के अनुसार विधिपूर्वक पारण करें।

यह भी पढ़ें:- 

Ramayan Ki Kahani: रामायण की रचना क्यों हुई? जानें रामायण की मुख्य घटनाएं, कथा और धार्मिक महत्व 

Ramayana: कौन थे ऋषि जाबालि? रामायण में क्या थी उनकी भूमिका, पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 

Hanuman Ji Story: कलियुग में कहां रहते हैं हनुमान जी? पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel