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Jyeshtha Purnima: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Jyeshtha Purnima: ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किसी भी प्रकार का विवाद, क्रोध या कटु वचन बोलने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शांत और सात्विक व्यवहार रखना शुभ माना गया है।

Jyeshtha Purnima:
Jyeshtha Purnima: सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्र देव और पवित्र नदियों की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर स्नान, दान, व्रत, जप और पूजा-पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन अनेक श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदी में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तथा जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ कुछ कार्यों से बचना भी आवश्यक माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि यदि व्यक्ति अनजाने में भी कुछ गलतियां कर देता है तो व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए और किन कार्यों से बचना चाहिए।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन क्या करें?

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो गंगा, यमुना, नर्मदा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा में तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है।

पूर्णिमा तिथि पर चंद्र देव को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर जल, दूध या मिश्रित अर्घ्य अर्पित करने से चंद्र दोषों की शांति और मानसिक सुख-शांति की कामना की जाती है। इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, वस्त्र, फल, अन्न, सत्तू, शक्कर, जौ तथा जरूरतमंदों को भोजन कराने का महत्व बताया गया है।

पूजा के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजा से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ जल से शुद्ध करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखकर मंत्रों का जाप करें और पूरी श्रद्धा के साथ आराधना करें। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, लेकिन तुलसी के पत्ते उसी दिन न तोड़ें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना उचित माना जाता है। यदि पूर्णिमा का व्रत रखा है तो व्रत के नियमों का पूरी श्रद्धा से पालन करें और पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किसी भी प्रकार का विवाद, क्रोध या कटु वचन बोलने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शांत और सात्विक व्यवहार रखना शुभ माना गया है।

इस दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा तथा नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को व्रत के नियमों का पालन करते हुए सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए।

पूजा के समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बिना स्नान किए पूजा करना या अशुद्ध अवस्था में पूजा करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।

भगवान विष्णु की पूजा में बासी या मुरझाए हुए फूल अर्पित नहीं करने चाहिए। पूजा में हमेशा ताजे और स्वच्छ पुष्पों का ही उपयोग करना चाहिए।

दान करते समय दिखावा या अहंकार नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि दान सदैव श्रद्धा, विनम्रता और निस्वार्थ भाव से किया जाना चाहिए।

जरूरतमंद, साधु-संत, बुजुर्ग या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। पूर्णिमा के दिन सभी के प्रति सम्मान और सद्भाव रखने की परंपरा बताई गई है।

किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है?

ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है, इसलिए इस पूर्णिमा पर शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल से भरा घड़ा, मिट्टी का मटका, पंखा, छाता, सत्तू, शक्कर, जौ, मौसमी फल, वस्त्र, अन्न और जल की व्यवस्था करना शुभ माना जाता है। यदि किसी प्यासे व्यक्ति को जल पिलाया जाए या सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ की व्यवस्था की जाए तो इसे भी पुण्यदायी कार्य माना गया है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु किन बातों का रखें ध्यान?

यदि आप ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं तो दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखें। पूजा के समय भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की आराधना करें। दिनभर भगवान के नाम का स्मरण, विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना गया है। व्रत के दौरान झूठ बोलने, किसी की निंदा करने, क्रोध करने या किसी का दिल दुखाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का भी पालन माना जाता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में ज्येष्ठ पूर्णिमा को स्नान, दान, जप, तप और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने, चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करने तथा दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होने की मान्यता है। इसी कारण देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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