Jaya Parvati Vrat: व्रत के अंतिम दिन पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।
Jaya Parvati Vrat: श्रावण मास में आने वाला जया पार्वती व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की कामना से इस व्रत को करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इसे श्रद्धापूर्वक रखती हैं। यह व्रत लगातार पांच दिनों तक किया जाता है और अंतिम दिन विधि-विधान के साथ इसका पारण किया जाता है। ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में यह प्रश्न रहता है कि जया पार्वती व्रत का समापन कब होगा, पारण किस समय करना चाहिए और इसका धार्मिक महत्व क्या है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं तो आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी संपूर्ण जानकारी...
जया पार्वती व्रत का समापन कब होगा?
साल 2026 में जया पार्वती व्रत का आरंभ 27 जुलाई से हुआ था। यह व्रत लगातार पांच दिनों तक रखा जाता है। इस प्रकार इसका समापन 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को होगा। इसी दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पांचवें दिन की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं और व्रत की पूर्णाहुति करते हैं।
जया पार्वती व्रत का पारण कब और कैसे करें?
व्रत के अंतिम दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद शिव-पार्वती के मंत्रों का जप करें और व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करें। पूजा पूर्ण होने के बाद भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन की मंगल कामना तथा मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
पूजा संपन्न होने के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। इसके पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें। कई स्थानों पर पारण से पहले कन्याओं या विवाहित महिलाओं को भोजन कराने की भी परंपरा प्रचलित है।
पांच दिनों तक कैसे किया जाता है यह व्रत?
जया पार्वती व्रत पांच दिनों तक संयम और श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिदिन पूजा की जाती है। अनेक श्रद्धालु केवल एक समय सात्विक भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या विशेष नियमों का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पांच दिनों में तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज, नशीले पदार्थ और क्रोध जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहने का प्रयास किया जाता है। प्रतिदिन दीप प्रज्वलित कर शिव-पार्वती का स्मरण और प्रार्थना की जाती है।
जया पार्वती व्रत की पूजा विधि
व्रत के अंतिम दिन पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। फिर उन्हें चंदन, अक्षत, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान शिव चालीसा, पार्वती स्तुति अथवा शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती की जाती है और परिवार के सभी सदस्य भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
जया पार्वती व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, जया पार्वती व्रत माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की स्मृति से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से वैवाहिक सुख और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-शांति बनी रहती है। अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार के मंगल के लिए इसकी पूजा करती हैं।
किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
जया पार्वती व्रत के अंतिम दिन पूजा से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा के दौरान शिव-पार्वती को स्वच्छ और ताजे पुष्प अर्पित करें। यदि संभव हो तो बेलपत्र तीन पत्तियों वाला और बिना खंडित होना चाहिए। पूजा के बाद प्रसाद सभी परिवारजनों में बांटें और व्रत का पारण सात्विक भोजन से करें। यदि आपने व्रत के दौरान कोई विशेष संकल्प लिया है, तो समापन के दिन उसे भगवान के समक्ष पूर्ण श्रद्धा से दोहराएं और उनकी कृपा की प्रार्थना करें।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)