Bhadrapad Masik Shivratri: भाद्रपद मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और रात्रि में भगवान शिव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर शिवजी की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन के कष्ट दूर करने में भगवान शिव की कृपा मिलती है। आखिर भाद्रपद मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा क्या है और इसे पढ़ने का क्या महत्व माना गया है? क्या आपने कभी सोचा है कि शिवरात्रि की रात व्रत कथा सुनने और पढ़ने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं।
कब है भाद्रपद मासिक शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि भी भगवान शिव को समर्पित होती है। इस दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है और पूरे दिन शिवजी का स्मरण किया जाता है। इसके बाद शाम और विशेष रूप से रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि की पूजा में रुद्राभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और जल अर्पित करने के साथ शिवजी की व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
शिवरात्रि की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने गया। पूरे दिन जंगल में घूमने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। शाम होने लगी तो वह एक पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। उसे डर था कि रात के समय कोई जंगली जानवर उस पर हमला न कर दे। जिस पेड़ पर वह बैठा था, उसके नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। शिकारी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। रातभर जागते हुए वह पेड़ से एक-एक करके पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा। संयोग से वे पत्ते शिवलिंग पर गिरते रहे। साथ ही, उसके पास रखा पानी भी धीरे-धीरे शिवलिंग पर गिरता रहा। इस तरह अनजाने में ही शिकारी से पूरी रात भगवान शिव का जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पण होता रहा। रातभर जागने के कारण उसका शिवरात्रि का व्रत भी हो गया।
शिवजी ने दिया आशीर्वाद
सुबह होने पर शिकारी अपने घर लौट गया। कुछ समय बाद उसका निधन हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब उसके कर्मों का हिसाब हुआ तो भगवान शिव की पूजा और व्रत के कारण उसे शिवजी की कृपा प्राप्त हुई। कथा में बताया जाता है कि अनजाने में की गई शिव आराधना का भी भगवान शिव ने फल दिया। इससे यह मान्यता जुड़ी है कि सच्ची श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति भक्ति से किया गया व्रत भक्त के जीवन में शुभ फल लेकर आता है।
व्रत कथा पढ़ने का महत्व
भाद्रपद मासिक शिवरात्रि पर व्रत कथा का पाठ करने की विशेष धार्मिक मान्यता बताई गई है। माना जाता है कि कथा सुनने या पढ़ने से भगवान शिव का स्मरण होता है और मन में भक्ति का भाव बढ़ता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन शिवजी की पूजा के साथ कथा का पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से और विवाहित लोग परिवार की सुख-शांति के लिए भी मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं।
ऐसे करें शिवजी की पूजा
भाद्रपद मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ और साबुत हो। इसके बाद शिवजी को धूप और दीप दिखाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
रात में पूजा का खास महत्व
मासिक शिवरात्रि में रात्रि पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु रात में भगवान शिव का पूजन करके व्रत कथा का पाठ करते हैं। कई भक्त रात में जागरण भी करते हैं और चारों प्रहर शिवजी की पूजा करते हैं। पूजा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके साथ अपनी मनोकामना भगवान शिव के सामने रखें और उनसे जीवन के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि की रात श्रद्धा से की गई शिव आराधना भगवान शिव को प्रसन्न करने वाली मानी जाती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)