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Darsh Amavasya: कब है दर्श अमावस्या? जानें तिथि, पूजन विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Darsh Amavasya: अमावस्या को चंद्रमा की वह अवस्था माना जाता है जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन देव पूजा के साथ पितरों के स्मरण और तर्पण का महत्व बताया गया है। 

Darsh Amavasya
Darsh Amavasya: अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों का स्मरण करने की परंपरा है। हर महीने आने वाली अमावस्या में कुछ खास अवसर भी माने जाते हैं। इन्हीं में दर्श अमावस्या का नाम भी आता है। इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे आत्मचिंतन, देव पूजन और पितरों के स्मरण के लिए शुभ माना जाता है। क्या आपको पता है कि सितंबर महीने में दर्श अमावस्या किस दिन पड़ रही है? इसकी तिथि क्या है और इस दिन किस तरह पूजा करनी चाहिए? आइए जानते हैं दर्श अमावस्या की तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

कब है दर्श अमावस्या

पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अमावस्या की तिथि 10 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। पंचांग गणना के अनुसार 10 सितंबर को दर्श अमावस्या मानी जाएगी। 

दर्श अमावस्या क्या है

अमावस्या को चंद्रमा की वह अवस्था माना जाता है जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन देव पूजा के साथ पितरों के स्मरण और तर्पण का महत्व बताया गया है। जब अमावस्या तिथि को विशेष रूप से दर्श अमावस्या कहा जाता है, तब इस दिन चंद्रमा से जुड़े धार्मिक कर्म और अमावस्या के पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

पूजा की तैयारी

दर्श अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद स्नान करके साफ कपड़े पहनें। अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थान पर स्नान किया जा सकता है। घर पर स्नान करने की स्थिति में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा भी है। स्नान के बाद पूजा स्थान की सफाई करके दीपक जलाएं। भगवान विष्णु, भगवान शिव या अपने इष्ट देव की श्रद्धा के साथ पूजा की जा सकती है। पूजा में धूप, दीप, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

पितरों का करें स्मरण

अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन अपने पूर्वजों को याद करके उनके नाम से जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि परिवार में श्राद्ध या तर्पण की परंपरा है तो उसके अनुसार विधि पूरी की जा सकती है। तर्पण करते समय श्रद्धा और शुद्ध भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

दान का भी महत्व

अमावस्या के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र, अन्न या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में दान को पुण्यकारी बताया गया है। दर्श अमावस्या पर विशेष रूप से अन्न और जरूरत की वस्तुओं का दान किया जा सकता है। किसी जरूरतमंद को भोजन कराना भी इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों में शामिल माना जाता है।

दीपदान कर सकते हैं

दर्श अमावस्या के दिन शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कुछ लोग नदी, तालाब या अन्य जल स्रोत के पास भी दीपदान करते हैं। हालांकि दीपदान करते समय स्थानीय परंपरा और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। भगवान की पूजा के साथ दीपक जलाने से घर का वातावरण भक्तिमय होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति का अनुभव होता है।

शिव पूजन का महत्व

अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं। इसके बाद बेलपत्र, फूल और फल अर्पित किए जा सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

दर्श अमावस्या पर क्या करें

इस दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं और अपने इष्ट देव की पूजा करें। पितरों का स्मरण करके उन्हें जल अर्पित करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन या अन्न का दान करें। शाम के समय भी भगवान के सामने दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है।

अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक परंपरा में अमावस्या को पितरों के स्मरण और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए तर्पण, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। इसी वजह से कई परिवारों में हर अमावस्या पर अपने पूर्वजों का स्मरण करने और धार्मिक कार्य करने की परंपरा चली आ रही है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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