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Ashadha Masik Krishna Janmashtami: कब है आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त व धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ashadha Masik Krishna Janmashtami: धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

Ashadha Masik Krishna Janmashtami Date: 
Ashadha Masik Krishna Janmashtami Date: सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। हालांकि भाद्रपद मास में आने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व सबसे अधिक माना जाता है, लेकिन हर महीने पड़ने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, व्रत और भक्ति करने का विशेष विधान है। आषाढ़ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी भक्तों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा कर सुख-समृद्धि, संतान सुख और परिवार की मंगलकामना करते हैं। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी...

कब है आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026, मंगलवार को प्रारंभ होगी और 8 जुलाई 2026, बुधवार को समाप्त होगी। धार्मिक पंचांगों के अनुसार आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 7 जुलाई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना, व्रत, भजन-कीर्तन तथा मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर लड्डू गोपाल का अभिषेक कर उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी और फल का भोग अर्पित करते हैं।

अष्टमी तिथि

अष्टमी तिथि प्रारंभ – 7 जुलाई 2026, मंगलवार, दोपहर 1:24 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – 8 जुलाई 2026, बुधवार, दोपहर 12:21 बजे
आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत – 7 जुलाई 2026, मंगलवार

पूजा का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा दिनभर की जा सकती है। प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा करना शुभ माना जाता है। वहीं कई श्रद्धालु संध्या के समय अथवा रात्रि में भी भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष आराधना करते हैं। यदि घर में लड्डू गोपाल विराजमान हों तो उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र, मोरपंख, बांसुरी और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद माखन-मिश्री, फल, पंजीरी तथा अन्य सात्विक भोग अर्पित किए जाते हैं।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा श्रीकृष्ण की पूजा करने से भगवान अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि श्रीकृष्ण की उपासना से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और शुभता का वास होता है।

अनेक भक्त इस दिन अपने परिवार की खुशहाली, संतान की उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं। आषाढ़ मास में पड़ने वाली यह अष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति प्रकट करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। इसलिए इस दिन श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन का भी विशेष महत्व बताया गया है।

कैसे करें मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा?

धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा अथवा लड्डू गोपाल को स्थापित किया जाता है। इसके पश्चात भगवान को गंगाजल, पंचामृत अथवा शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। फिर उन्हें नए वस्त्र, आभूषण, मोरपंख और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। चंदन का तिलक लगाकर धूप-दीप जलाया जाता है तथा माखन-मिश्री, दूध, दही, मक्खन, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।

पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके बाद श्रीकृष्ण चालीसा, विष्णु सहस्रनाम अथवा श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध का पाठ भी श्रद्धानुसार किया जा सकता है। अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।

व्रत के दौरान किन बातों का रखा जाता है ध्यान?

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन सात्विकता का पालन करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करके भगवान का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध, असत्य, तामसिक भोजन और नकारात्मक व्यवहार से दूर रहकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में समय व्यतीत करना शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान भगवान के नाम का जप, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण को क्या अर्पित करें?

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें प्रमुख रूप से माखन-मिश्री, दूध, दही, मक्खन, पंजीरी, तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। यदि घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है तो उन्हें नए वस्त्र पहनाकर झूले में विराजमान कराया जाता है और श्रद्धापूर्वक आरती की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से अर्पित किया गया साधारण भोग भी भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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